8th Pay Commission Pensioners Demand: 8वें वेतन आयोग में पेंशनर्स के लिए क्या छूट गया? ToR में आखिर ऐसा क्या है जिससे नाराज हैं पेंशनर्स? क्यों PM मोदी के सामने रखी ये मांग

8th Pay Commission Pensioners Demand: पेंशनभोगियों और BPS व AIDEF जैसे संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के ToR में बदलाव की मांग उठाई है। उनकी प्रमुख मांगों में पेंशन का दोबारा संशोधन, पेंशन में समानता सुनिश्चित करना और फैमिली पेंशन से जुड़े नियमों में जरूरी बदलाव शामिल है।

8th Pay Commission Pensioners Demand: 8वें वेतन आयोग में पेंशनर्स के लिए क्या छूट गया? ToR में आखिर ऐसा क्या है जिससे नाराज हैं पेंशनर्स? क्यों PM मोदी के सामने रखी ये मांग

(8th Pay Commission Pensioners Demand/ Image Credit: AI-generated)

Modified Date: August 17, 2026 / 12:58 pm IST
Published Date: August 17, 2026 12:56 pm IST
HIGHLIGHTS
  • ToR में बदलाव: पेंशनर्स ने मांग उठाई।
  • मुख्य मांग: पेंशन और फैमिली पेंशन संशोधन।
  • ‘अनफंडेड कॉस्ट’: शब्द हटाने की अपील।

नई दिल्ली: 8th Pay Commission Pensioners Demand: 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को लेकर पेंशनभोगी संगठनों ने केंद्र सरकार से बदलाव (8th Pay Commission Pensioners Demand) की मांग की है। भारत पेंशनर्स समाज (BPS), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF), NCCPA और FCPA जैसे संगठनों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा है और संगठनों ने मांग की है कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन और फैमिली पेंशन के संशोधन को ToR में साफ तौर पर शामिल किया जाए।

पुराने पेंशनर्स को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग

पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि मौजूदा ToR में पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन समीक्षा को लेकर (8th Pay Commission Pensioners Demand) पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। उनका कहना है कि पेंशन संशोधन, पुराने और भविष्य के पेंशनर्स के बीच समानता, फैमिली पेंशन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले अन्य लाभों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। इसलिए संगठनों ने सभी लागू पेंशन योजनाओं के तहत पेंशन और उससे जुड़े लाभों की समीक्षा का प्रावधान जोड़ने की मांग की है।

‘अनफंडेड कॉस्ट’ शब्द पर भी आपत्ति

AIDEF ने ToR में गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की ‘अनफंडेड कॉस्ट’ यानी बिना फंड वाली लागत के उल्लेख पर भी सवाल उठाया है। संगठन का तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों को सेवा के बाद मिलने वाली पेंशन को केवल सरकारी वित्तीय देनदारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक पेंशन कर्मचारियों के लंबे समय की सेवा से जुड़ा अधिकार है। इसलिए इस शब्द को हटाने या बदलने की जरूरत है।

OPS को लेकर क्या कहना है?

संगठनों का कहना है कि ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत सरकार पर आने वाले खर्च को केवल वित्तीय बोझ बताना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों की पेंशन सेवा के बदले मिलने वाला लाभ है। चूंकि पुरानी पेंशन व्यवस्था में कर्मचारियों की सैलरी से योगदान नहीं काटा जाता, इसलिए इसका पूरा भुगतान सरकार करती है। इसी वजह से ToR में इस्तेमाल शब्दों को लेकर संगठनों ने आपत्ति जताई है।

पेंशन समानता और 45,000 रुपये की मांग

पेंशनर्स संगठनों ने पुराने और नए रिटायर कर्मचारियों के बीच पेंशन में मौजूद अंतर को खत्म करने की भी (8th Pay Commission Pensioners Demand) मांग की है। उनका कहना है कि समान परिस्थितियों में रिटायर कर्मचारियों को पेंशन में बराबरी मिलनी चाहिए। इसके अलावा आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पेंशन को मौजूदा 9,000 रुपये से बढ़ाकर 45,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव रखने की बात कही गई है। अब पेंशनर्स की नजर सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।