नयी दिल्ली/ न्यूयॉर्क, 18 मई (भाषा) अदाणी समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज लि. ने सोमवार को अमेरिकी वित्त विभाग के ‘विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय’ (ओएफएसी) को 27.5 करोड़ डॉलर का भुगतान कर ईरानी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले का निपटारा कर लिया।
यह मामला गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के जरिये ईरान से जुड़े तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के आयात से संबंधित है।
कंपनी ने कहा कि उसने मामले की जांच में ‘विस्तृत सहयोग’ दिया और निष्कर्षों का ‘स्वेच्छा से खुलासा’ भी किया।
अरबपति उद्योगपति गौतम अदाणी की अगुवाई वाली अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) ने ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के स्पष्ट उल्लंघन से जुड़ी संभावित सिविल देनदारी के निपटारे के लिए 27.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है।
हालांकि, कंपनी ने कहा कि यह समझौता किसी प्रकार की दोषसिद्धि या गलत काम की पुष्टि नहीं करता और इससे संबंधित सभी देनदारियों का निपटारा कर देता है।
कंपनी ने नवंबर, 2023 से जून, 2025 के बीच दुबई-आधारित एक कारोबारी से एलपीजी की खरीद की थी। उस कारोबारी ने खुद को ओमान और इराक से आपूर्ति करने वाला मध्यस्थ बताया था, लेकिन जांच में सामने आया कि गैस की वास्तविक आपूर्ति ईरान से जुड़ी थी।
ओएफएसी के निपटान आदेश के मुताबिक, ‘‘एईएल के एलपीजी आयात से जुड़े किसी भी पक्ष पर उस समय प्रतिबंध नहीं लगे थे, और कंपनी को उपलब्ध कराए गए किसी भी दस्तावेज में एलपीजी का ईरानी उद्यम होने का स्पष्ट रूप से संकेत करने वाली कोई जानकारी नहीं थी।’’
हालांकि, ओएफएसी ने कहा कि एईएल और अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड की प्रतिबंध अनुपालन व्यवस्था में ऐसे जोखिमों को पूरी तरह से संबोधित करने वाले अतिरिक्त उपायों की कमी थी।
जून, 2025 में प्रतिबंध उल्लंघन के आरोपों से जुड़ी सार्वजनिक रिपोर्ट आने के बाद कंपनी ने सभी एलपीजी आयात तत्काल रोक दिए और जांच शुरू की। बाद में अमेरिका स्थित कानूनी सलाहकारों की मदद से कंपनी की विस्तृत जांच की गई।
ओएफएसी के आदेश के मुताबिक, अदाणी एंटरप्राइजेज ने जांच में पूरा सहयोग किया, बड़ी मात्रा में दस्तावेज उपलब्ध कराए और एजेंसी के सभी सवालों का जवाब दिया। साथ ही कंपनी ने अपने पूरे समूह में प्रतिबंध अनुपालन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई सुधारात्मक कदम भी उठाए।
आदेश के मुताबिक, कंपनी ने सभी एलपीजी आयात रोक दिए, प्रतिबंध अनुपालन प्रक्रियाओं को मजबूत किया और अतिरिक्त आंतरिक नियंत्रण लागू किए।
ओएफएसी दिशानिर्देशों के तहत, समीक्षा के दायरे में आए लेनदेन के मूल्य के आधार पर अधिकतम वैधानिक जुर्माना लगभग 38.4 करोड़ डॉलर तक हो सकता था। लेकिन एजेंसी ने कंपनी द्वारा स्वैच्छिक रूप से जानकारी देने, सक्रिय सहयोग और अनुपालन सुधार के कदम उठाने का हवाला देते हुए अंतिम समझौता राशि घटाकर 27.5 करोड़ डॉलर कर दी।
यह अमेरिका में पिछले कुछ दिनों में अदाणी समूह के खिलाफ बंद होने वाला दूसरा मामला है। पिछले सप्ताह अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी ने अमेरिकी बाजार नियामक प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) के उन आरोपों को निपटाने के लिए 1.8 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई थी, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने समूह की नवीकरणीय ऊर्जा इकाई के लिए पूंजी जुटाने के दौरान कथित रिश्वतखोरी योजना को छिपाकर निवेशकों से झूठ बोला था।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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