आपूर्ति झटकों के मुद्रास्फीति पर प्रभाव को लेकर केंद्रीय बैंक सतर्क : गवर्नर मल्होत्रा

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आपूर्ति झटकों के मुद्रास्फीति पर प्रभाव को लेकर केंद्रीय बैंक सतर्क : गवर्नर मल्होत्रा

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  • Publish Date - May 18, 2026 / 09:32 PM IST,
    Updated On - May 18, 2026 / 09:32 PM IST

मुंबई, 18 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक इस बात पर करीबी नजर रख रहा है कि आपूर्ति संबंधी झटके कब और किस हद तक सामान्य मूल्य स्तर में शामिल होकर मुद्रास्फीति को प्रभावित करते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर मौद्रिक नीति के तहत कार्रवाई की जा सके।

मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई जून, 2025 से अब तक तटस्थ रुख बनाए हुए है, जिससे उसे परिस्थितियों के अनुसार लचीला बने रहने और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संतुलित निर्णय लेने की सुविधा मिलती है।

पिछले सप्ताह स्विट्जरलैंड में स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘अत्यधिक अनिश्चितता के समय में मौद्रिक नीति’ विषय पर एक पैनल चर्चा के दौरान गवर्नर ने कहा कि भारत अक्सर आपूर्ति संबंधी झटकों का सामना करता रहा है।

मल्होत्रा ने कहा कि जब यह माना जाता है कि ऐसे झटकों का प्रभाव अस्थायी है और जल्दी समाप्त हो जाएगा, तो आरबीआई आमतौर पर उनके शुरुआती प्रभाव को नजरअंदाज कर देता है।

उन्होंने कहा, “लेकिन यदि कीमतों में लगातार वृद्धि से मजदूरी, उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ती है और मुद्रास्फीति व्यापक रूप ले लेती है, तो ऐसी स्थिति में नजरअंदाज करने की नीति उपयुक्त नहीं रहती और सख्त मौद्रिक नीति की आवश्यकता पड़ सकती है।”

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्थिति अभी भी अस्थिर है और उसके व्यापक आर्थिक प्रभाव सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह लगातार निगरानी की जा रही है कि कहीं आपूर्ति संबंधी झटके सामान्य मूल्य स्तर में स्थायी रूप से शामिल न हो जाएं, जिससे मौद्रिक नीति में बदलाव की आवश्यकता पड़े।

मल्होत्रा ने कहा कि मूल्य स्थिरता पर केंद्रित नीतिगत ढांचे में लचीलापन जरूरी है, ताकि केंद्रीय बैंक अस्थायी झटकों को नजरअंदाज कर सकें, लेकिन साथ ही डेटा आधारित और सतर्क दृष्टिकोण अपनाते हुए जोखिमों का लगातार आकलन भी करते रहें।

भाषा योगेश अजय

अजय