नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) केंद्र सरकार ने बुधवार को आगामी खरीफ सत्र के लिए देश में बीज और कृषि-रसायनों की पर्याप्त आपूर्ति होने पर जोर देते हुए राज्यों से इनकी जमाखोरी, कालाबाजारी, तस्करी और उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग पर रोक लगाने की अपील की।
पश्चिम एशिया में संघर्ष से उपजे हालात पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कृषि मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी ने कहा, ‘‘बीज सबसे महत्वपूर्ण उत्पाद हैं। खरीफ सत्र के फसलों की बुवाई के लिए बीजों की पर्याप्त उपलब्धता है।’’
उन्होंने कहा कि खरीफ सत्र 2026 के लिए बीजों की कुल अनुमानित आवश्यकता 166.46 लाख क्विंटल है, जबकि इनकी उपलब्धता 185.74 लाख टन है। इस तरह बीजों की 19.29 लाख टन की अतिरिक्त उपलब्धता है।
द्विवेदी ने कहा कि सभी प्रमुख फसलों के लिए बीजों की पर्याप्त आपूर्ति है। उन्होंने कहा कि धान की फसल के लिए 80.9 लाख क्विंटल, सोयाबीन के लिए 35.7 लाख क्विंटल, मूंगफली के लिए 21.1 लाख क्विंटल और मक्का के लिए 11.9 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध हैं।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सभी राज्यों में बीजों की उपलब्धता पर्याप्त है।
उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘आने वाले खरीफ मौसम, साथ ही रबी सत्र को देखते हुए, जहां तक बीजों का सवाल है, हम एक आरामदायक स्थिति में हैं।’’
उर्वरक के स्टॉक के बारे में, द्विवेदी ने कहा कि खरीफ सत्र के लिए उर्वरकों की कुल जरूरत 390.54 लाख टन अनुमानित है। इसका शुरुआती स्टॉक 180 लाख टन है, जो कुल जरूरत का 46 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, ‘‘आरंभिक स्टॉक काफी अच्छी मात्रा में है।’’
द्विवेदी ने बताया कि कृषि और उर्वरक सचिवों ने स्थिति का जायजा लेने के लिए 30 मार्च को राज्यों के सचिवों के साथ एक बैठक की थी। बैठक में राज्यों से प्रमुख लागत उत्पादों की अंतिम छोर तक उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया।
अतिरिक्त सचिव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘राज्यों से यह भी अनुरोध किया गया कि वे एक विशेष अभियान चलाएं ताकि जमाखोरी, कालाबाज़ारी, सीमापार तस्करी और उर्वरकों का गैर-कृषि कार्यों में इस्तेमाल न हो।’’
कृषि-रसायनों के बारे में द्विवेदी ने कहा कि इनकी पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है।
फसल के लागत उत्पादों की कीमतों के बारे में उन्होंने कहा कि थोक कीमतों पर नजर रखी जा रही है, और वे पिछले कुछ वर्षों की ही तरह सामान्य दायरे में हैं।
द्विवेदी ने कहा कि टमाटर, आलू और प्याज़ की कीमतें सामान्य दायरे में हैं और उनमें थोड़ा सुधार दिख रहा है।
ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका एवं इजराइल के संयुक्त हमले के बाद पश्चिम एशिया का संकट बढ़ा है। इस संकट से गैस और तेल की आपूर्ति पर गंभीर असर डाला है।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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