नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को कहा कि देश में तेजी से जुड़ रही नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के बीच ग्रिड स्थिरता बनाए रखने और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारने में कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित प्रौद्योगिकियां अहम भूमिका निभा सकती हैं।
जोशी ने यहां आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन’ से इतर कहा कि देश में गीगावाट स्तर पर सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाएं जुड़ रही हैं।
उन्होंने कहा, “कभी सौर घंटे के दौरान उत्पादन अधिक होता है तो कभी मौसम के कारण बिजली उत्पादन घट जाता है। ऐसे में ग्रिड स्थिरता चुनौती बन सकती है।”
उन्होंने इस बारे में कहा, “हवा हर समय नहीं चलती है और सूरज भी 24 घंटे नहीं चमकता है। ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से अधिक और कम उत्पादन के दौरान ग्रिड प्रबंधन के लिए एआई-आधारित प्रौद्योगिकी और ‘डिजिटल ट्विंस’ (वास्तविक प्रणाली की आभासी प्रतिकृति) उपयोगी हो सकते हैं।”
केंद्रीय मंत्री ने ‘कर्टेलमेंट’ की समस्या का भी जिक्र किया। कर्टेलमेंट का मतलब पवन या सौर संयंत्रों से उपलब्ध स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को घटाना है, जिससे पूरी बिजली ग्रिड में नहीं डाली जा पाती। उन्होंने संकेत दिया कि एआई आधारित पूर्वानुमान और वास्तविक समय में प्रबंधन से इस समस्या को कम किया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के मुताबिक, इस दशक के अंत तक सौर एवं पवन जैसे नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी उल्लेखनीय होगी, जिससे बिजली तंत्र की जटिलता बढ़ेगी और इसमें एआई समाधान उपयोगी साबित हो सकते हैं।
एआई पारिस्थितिकी पर केंद्रित इस सम्मेलन के एक सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (सीईए) के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने कहा कि एआई संसाधनों के अनुकूलन के जरिये बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता दोनों में सुधार लाया जा सकता है, लेकिन इसे अपनाने की रफ्तार तेज करनी होगी।
प्रसाद ने कहा, “बिजली क्षेत्र में अपार अवसर हैं। हमें तेजी से आगे बढ़ना होगा ताकि हम पीछे न रह जाएं।”
उन्होंने बताया कि संसाधन पर्याप्तता, पारेषण, वितरण नेटवर्क और बिजली खरीद योजना जैसे क्षेत्रों में एआई से बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
ग्रिड संचालन के बारे में उन्होंने कहा, “हम अभी इसे आदर्श तरीके से नहीं कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर अनुकूलन से लागत और आपूर्ति बहाली का समय कम हो सकता है।”
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