एआई को आधार से जोड़कर सबको मिल सकते हैं ट्यूटर, चिकित्सक, कृषि विशेषज्ञः विनोद खोसला
एआई को आधार से जोड़कर सबको मिल सकते हैं ट्यूटर, चिकित्सक, कृषि विशेषज्ञः विनोद खोसला
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) उद्यम पूंजी निवेशक विनोद खोसला ने अगले कुछ वर्षों में भारतीय नागरिकों को कृत्रिम मेधा (एआई) से संचालित ट्यूटर, चिकित्सक एवं कृषि विशेषज्ञ उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी रूपरेखा पेश करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इन सार्वजनिक सेवाओं को ‘आधार’ पारिस्थितिकी में एकीकृत किया जा सकता है।
खोसला ने यहां आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि इन एआई प्रणालियों के निर्माण एवं संचालन के लिए पहले एक गैर-लाभकारी कंपनी बनाई जाए जिसे बाद में आधार प्रणाली में स्थानांतरित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इसे एक एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) जैसी सेवा के साथ भी जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा, “आधार ने हमें यूपीआई जैसी सुविधा उपलब्ध कराई। उसी पहचान-आधारित प्रणाली पर, जहां बुनियादी ढांचा पहले से तैयार है, हम एक या दो वर्षों में हर भारतीय को ये सार्वजनिक सेवाएं दे सकते हैं।”
खोसला ने इस पर जोर दिया कि देश को एआई के ऐसे अनुप्रयोगों पर ध्यान देना चाहिए, जो सीधे तौर पर आबादी के निचले आधे हिस्से को लाभ पहुंचाएं, तभी एआई का राष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तनकारी प्रभाव दिखेगा।
उन्होंने शिक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि एआई-आधारित व्यक्तिगत ट्यूटर कोई भविष्य की अवधारणा नहीं हैं, बल्कि लाखों छात्रों पहले से ही इसका उपयोग कर रहे हैं। ऐसे ट्यूटर छात्र की सीखने की कमी को चिह्नित कर पाठ्यक्रम को उसी के हिसाब से अनुकूलित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ये प्रणालियां सरकार के ‘दीक्षा’ मंच की उपयोगिता को भी बढ़ा सकती हैं, क्योंकि यह उपलब्ध व्यापक सामग्री को व्यवस्थित एवं व्यक्तिगत बना सकती हैं।
स्वास्थ्य सेवा के संदर्भ में उन्होंने 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली एआई-आधारित प्राथमिक उपचार प्रणाली का प्रस्ताव रखा, जो लगभग नगण्य लागत पर पुरानी बीमारियों के प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, फिजियोथेरेपी और पोषण मार्गदर्शन जैसी सेवाएं प्रदान कर सके।
कृषि क्षेत्र के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि छोटी जोत वाले किसानों सहित हर किसान को एआई के माध्यम से ‘पीएचडी स्तर के कृषि विशेषज्ञ’ तक 24 घंटे पहुंच उपलब्ध कराई जा सकती है।
खोसला ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसी सेवाओं को एआई के जरिये बड़े पैमाने पर सुलभ बनाना अपेक्षाकृत कम लागत में संभव है और ऐसा न करना देश के लिए एक बड़ा अवसर गंवाने जैसा साबित हो सकता है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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