मुंबई, 18 मार्च (भाषा) पायलट के संगठन ‘अल्पा इंडिया’ ने बुधवार को विमानन नियामक डीजीसीए से एयर इंडिया को दो-पायलट वाली लंबी दूरी की उड़ानों के लिए दी गई ताजा रियायतों को वापस लेने का आग्रह किया है। संगठन ने पश्चिम एशिया संकट के बीच इन रियायतों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे पायलटों में ‘थकान का जोखिम’ एक असुरक्षित स्तर तक बढ़ जाएगा।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर चिंता जताते हुए, ‘एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (अल्पा इंडिया) ने चालक दल और यात्रियों के लिए ‘युद्ध-जोखिम बीमा’ जैसे सुरक्षा उपायों की भी मांग की है।
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को लिखे एक पत्र में एसोसिएशन ने पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर बोइंग 787 के परिचालन के लिए ‘उड़ान ड्यूटी समय सीमा’ (एफडीटीएल) के नियमों में ढील दिए जाने पर गंभीर चिंता जताई है।
एसोसिएशन ने स्वीकार किया कि वर्तमान स्थिति के कारण ये रियायतें आवश्यक हो गई थीं, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित किया कि बोइंग 787 विमानों में ‘नॉन-रिक्लाइनिंग’ (पीछे न झुकने वाली) पायलट सीट के संबंध में पहले कोई परामर्श नहीं किया गया था।
पिछले सप्ताह, डीजीसीए ने अस्थायी रियायतें देते हुए एयर इंडिया की लंबी दूरी की उड़ानों के लिए उड़ान समय को 1.30 घंटे बढ़ाकर 11.30 घंटे और उड़ान ड्यूटी अवधि (एफडीपी) को 1.45 घंटे बढ़ाकर 11.45 घंटे कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के कारण हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों की वजह से एयरलाइन को लंबे मार्गों का उपयोग करना पड़ रहा है।
उड़ान नियमों में ये अस्थायी रियायतें 30 अप्रैल तक लागू हैं।
भाषा सुमित अजय
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