मुंबई, 18 मार्च (भाषा) सोशल मीडिया पर लोकप्रिय लोगों की तरफ से उत्पादों या सेवाओं का प्रचार यानी इन्फ्लूएंसर मार्केटिंग के क्षेत्र में नैतिक मुद्दों को लेकर चिंता जताते हुए सरकार ने बुधवार को कहा कि पारदर्शिता, प्रामाणिकता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू ने यहां भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि लगभग 4,000 करोड़ रुपये के इस उद्योग में उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए सुधार की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “इन्फ्लूएंसर मार्केटिंग के मामले में नैतिक चिंताओं का गंभीरता से समाधान करना जरूरी है। इनमें जरूरी खुलासे, प्रामाणिकता और जवाबदेही से जुड़े सवाल शामिल हैं।”
उन्होंने देश में विज्ञापन जगत की स्व-नियामकीय संस्था एएससीआई के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि ये समस्याएं सीमित न होकर प्रणालीगत हैं और इसके लिए सरकार, उद्योग तथा नियामक संस्थाओं को मिलकर सुधार करना होगा।
जाजू ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यह क्षेत्र करीब 80 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ा है और अब यह 4,000 करोड़ रुपये का उद्योग हो चुका है।
उन्होंने विदेशों से आने वाले विज्ञापनों को लेकर भी चिंता जताते हुए कहा कि निवेश और रोजगार से जुड़े कई फर्जी विज्ञापनों का स्रोत भारत के बाहर पाया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस समस्या से निपटने के लिए कानून, प्लेटफॉर्म के संचालन, साइबर प्रवर्तन और स्व-नियामकीय ढांचे के स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी होंगे।’’
उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल बढ़ने से दक्षता जरूर बढ़ रही है, लेकिन यह विज्ञापन में ‘भारी जोखिम’ भी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी अब विज्ञापन सुधार के लिए नहीं, बल्कि धोखाधड़ी को व्यवस्थित एवं बड़े पैमाने पर चलाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है।
जाजू ने कहा, “लोगों को वैध ढंग से प्रभावित करने और जानबूझकर किए गए छल के बीच की रेखा दिन-प्रतिदिन हल्की होती जा रही है। एक आम उपयोगकर्ता के लिए यह समझना बहुत मुश्किल हो जाएगा कि उसके साथ कहां छल हो रहा है।”
बाद में जाजू ने ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज’ का दौरा किया और देश में रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर जोर दिया।
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प्रेम अजय
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