नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक व्यवधानों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद वैश्विक कंपनियों तथा संस्थागत निवेशकों ने हाल के महीनों में भारत में 90 अरब डॉलर से अधिक के नए निवेश की घोषणा की है। यह भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं और निवेश गंतव्य के रूप में उसकी बढ़ती वैश्विक साख को दर्शाता है।
सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित निवेश कृत्रिम मेधा (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल अवसंरचना, विनिर्माण और औद्योगिक प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। इससे वैश्विक कंपनियों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने तथा उच्च वृद्धि वाले बाजारों में विस्तार के बीच अहम निवेश गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
अमेजन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एंडी जेसी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुलाकात के बाद कंपनी ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह वर्ष 2030 तक भारत में अपने कुल निवेश की प्रतिबद्धता बढ़ाकर 48 अरब डॉलर करेगा। यह निवेश क्लाउड अवसंरचना, एआई और डिजिटल सेवाओं के विस्तार में किया जाएगा।
इस महीने की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया की डेटा सेंटर कंपनी एयरट्रंक ने 2030 तक भारत में पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने के लिए 30 अरब डॉलर निवेश करने की योजना की घोषणा की थी। यह देश में अब तक के सबसे बड़े डिजिटल अवसंरचना निवेशों में से एक है।
फ्रांस की निर्माण सामग्री से जुड़ी कंपनी सेंट-गोबेन ने 18 जून को कहा था कि वह अगले पांच वर्षों में भारत में अतिरिक्त एक अरब यूरो (1.15 अरब डॉलर) का निवेश करेगी। कंपनी ने भारत को अपने सबसे तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजारों में से एक बताया।
कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (सीपीपीआईबी) ने भी सीटीआरएलएस डाटासेंटर्स के साथ मिलकर हाइपरस्केल डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए 7,000 करोड़ रुपये तक निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं औद्योगिक प्रौद्योगिकी कंपनी एबीबी ने मार्च में भारत में अपने विनिर्माण और अनुसंधान नेटवर्क के विस्तार के लिए 7.5 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की थी।
गूगल ने भारत में एआई अवसंरचना के विस्तार के लिए पांच वर्षों में 15 अरब डॉलर की योजना की घोषणा फरवरी में की थी। इसमें डेटा सेंटर, समुद्र के भीतर बिछाई जाने वाली संचार केबल, क्लाउड क्षमता और कार्यबल कौशल विकास जैसी पहल शामिल हैं।
ये घोषणाएं ऐसे समय में हुई हैं जब बहुराष्ट्रीय कंपनियां पश्चिम एशिया के संघर्ष, बदलती व्यापार नीतियों और कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि जैसी भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इसके बावजूद वे भारत को विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और डिजिटल अवसंरचना के लिए एक रणनीतिक बाजार के रूप में देख रही हैं।
सूत्रों ने बताया कि हालिया निवेश प्रतिबद्धताएं भारत की दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाओं में वैश्विक कंपनियों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती हैं। इसके पीछे देश का विशाल घरेलू बाजार, तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, बेहतर होती अवसंरचना और विदेशी निवेश आकर्षित करने की नीतियां प्रमुख कारण हैं।
निवेश घोषणाओं की यह श्रृंखला दर्शाती है कि भारत वैश्विक पूंजी के लिए तेजी से आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत को भविष्य की वृद्धि, डिजिटल बदलाव और विनिर्माण विस्तार का प्रमुख केंद्र मान रही हैं।
सूत्रों ने कहा कि इन सभी निवेश प्रतिबद्धताओं से स्पष्ट है कि वैश्विक आर्थिक तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत पर अपना दांव और मजबूत कर रही हैं।
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