(8th Pay Commission/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: 8th Pay Commission: आठवां केंद्रीय वेतन आयोग इन दिनों राज्य सरकारों के साथ अंतिम दौर की बातचीत में है। मुख्य चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है जो वेतन और पेंशन तय करने का सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। कर्मचारी संगठन इसे 3.68 या उससे अधिक करने की मांग कर रहे हैं। जबकि शुरुआती संकेत बताते हैं कि आयोग 7वें वेतन आयोग के 2.57 के आसपास ही संतुलित रुख अपना सकता है।
सूत्रों के मुताबिक आयोग केंद्र और राज्य सरकारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ का गहराई से आंकलन कर रहा है। महंगाई, राजकोषीय घाटा और सरकारी खर्च को ध्यान में रखते हुए अंतिम सिफारिशें तैयार की जा रही हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल फोकस संभावित फिटमेंट फैक्टर की सीमा तय करने और नए वेतन ढांचे के वित्तीय प्रभाव को समझने पर है।
कर्मचारी यूनियन न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर लगभग 69,000 रुपये तक करने और 3.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग कर रही हैं। दूसरी ओर आयोग ने कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना और अन्य जगहों से फीडबैक लिया है। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में भी स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठकें हो चुकी है।
मेमोरेंडम जमा करने की प्रक्रिया 15 जून को पूरी हो चुकी है और अब आयोग सभी सुझावों और आंकड़ों की समीक्षा कर रहा है। इसके बाद रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, जिसमें वेतन और पेंशन का नया ढांचा तय होगा। इससे पहले 7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। जिससे न्यूनतम वेतन में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी और सरकारी खर्च में भी बड़ी वृद्धि देखी गई थी।