(Analog Paneer Ban/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: Analog Paneer Ban: अगर आप पनीर खाना पसंद करते हैं या होटल-रेस्टोरेंट में पनीर की डिश ऑर्डर करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। देश में इन दिनों एनालॉग पनीर के इस्तेमाल (Analog Paneer Ban) को लेकर खाद्य सुरक्षा और सही जानकारी से जुड़ी चिंता बढ़ रही है। कई राज्यों में ऐसे उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। अब केंद्र स्तर पर भी इसके इस्तेमाल को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है।
एनालॉग पनीर देखने में सामान्य (Analog Paneer Ban) पनीर जैसा ही लगता है, लेकिन इसे पूरी तरह दूध से तैयार नहीं किया जाता। इसमें डेयरी फैट और दूध से मिलने वाले ठोस पदार्थों की जगह वनस्पति तेल या दूसरी गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि इसे असली पनीर से अलग माना जाता है। FSSAI पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ऐसे उत्पादों को केवल ‘पनीर’ नाम से बेचना नियमों के अनुरूप नहीं है। खाद्य नियामक का जोर इस बात पर है कि ग्राहक को उत्पाद के बारे में सही और साफ जानकारी मिले।
एनालॉग पनीर को लेकर कई राज्यों में जांच और कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड और पंजाब शामिल हैं। FSSAI के CEO राजित पुन्हानी के अनुसार, यह मुद्दा अब किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसी कारण केंद्र स्तर पर आगे की कार्रवाई और नियमों को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
मामला केवल पनीर की गुणवत्ता (Analog Paneer Ban) का नहीं है। चिंता यह भी है कि कुछ जगहों पर गैर-डेयरी उत्पाद को गलत नाम या लेबल के जरिए ग्राहकों के सामने असली पनीर के रूप में पेश किया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को यह पता नहीं चल पाता कि वे वास्तव में क्या खरीद या खा रहे हैं। अगर केंद्र सरकार देशभर में एनालॉग पनीर के इस्तेमाल और बिक्री पर रोक या नए नियम लागू करती है तो होटल, रेस्टोरेंट और दूसरे खाद्य कारोबारियों को अपने उत्पादों और लेबलिंग में बदलाव करना पड़ सकता है।