वाशिंगटन, 16 अप्रैल (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि एशिया वैश्विक वृद्धि का मुख्य चालक बना रहेगा, जिसमें भारत और चीन क्षेत्रीय विस्तार में 70 प्रतिशत का योगदान देंगे। साथ ही संगठन ने यह भी कहा कि खाड़ी संकट के कारण ऊर्जा का झटका इस क्षेत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।
आईएमएफ ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी शुल्क और व्यापारिक अनिश्चितता के चलते क्षेत्रीय वृद्धि दर के 2026 में घटकर 4.4 प्रतिशत और 2027 में 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा 2025 में पांच प्रतिशत था।
आईएमएफ के एशिया प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘एशिया ने 2026 में एक मजबूत स्थिति के साथ प्रवेश किया है और अमेरिकी शुल्कों तथा बढ़ती अनिश्चितता का खामियाजा भुगतने के बावजूद क्षेत्र की वृद्धि दर जुझारू बनी हुई है।’’
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की जीवाश्म ईंधन पर उच्च निर्भरता और प्रमुख वस्तुओं के लिए संघर्ष वाले क्षेत्रों पर निर्भरता को देखते हुए, ऊर्जा का नया झटका उन्हें नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि इस संकट के कारण मुद्रास्फीति बढ़ रही है, बाहरी संतुलन कमजोर हो रहा है और वित्तीय मोर्चे पर सख्ती बढ रही है।
आईएमएफ के अनुसार, एशिया दुनिया के लगभग 38 प्रतिशत तेल और 24 प्रतिशत प्राकृतिक गैस की खपत करता है।
श्रीनिवासन ने कहा कि 2025 के अंत में अधिकांश एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि दर उम्मीद से अधिक रही। इसका श्रेय निर्यात और खपत को जाता है जो अनुमान से बेहतर रहे। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका को एशिया का निर्यात घटा है, लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों में यह बढ़ा है।’’
भाषा पाण्डेय अजय
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