गुवाहाटी, 10 जुलाई (भाषा) असम सरकार ने छोटे चाय उत्पादकों के लिए कर छूट सीमा चार गुना बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने और परंपरागत एवं विशेष श्रेणी की चाय पर दी जाने वाली सब्सिडी में 50 प्रतिशत वृद्धि का शुक्रवार को प्रस्ताव किया।
राज्य के वित्त मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने अपना पहला बजट पेश करते हुए निर्यातोन्मुख और प्रीमियम गुणवत्ता वाली असम सीटीसी चाय के लिए भी सब्सिडी देने की घोषणा की।
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं, छोटे चाय उत्पादकों को राहत देने के लिए कृषि आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये की वार्षिक कृषि आय से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखता हूं।’’
बरुआ के अनुसार, बड़े करदाताओं के लिए एक अप्रैल, 2026 से कर फिर से लागू किया जाएगा और इससे प्राप्त अतिरिक्त राजस्व का उपयोग केवल चाय बागान समुदायों के कल्याण के लिए किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ‘परंपरागत’ चाय का उत्पादन 2021-22 में 4.39 करोड़ किलोग्राम से बढ़कर 2025-26 में लगभग आठ करोड़ किलोग्राम हो गया जो चार वर्षों में 80 प्रतिशत से अधिक की मजबूत वृद्धि दर्शाता है।
मंत्री ने कहा, ‘‘ असम ने प्रीमियम माचा चाय के सफल उत्पादन के साथ चाय क्षेत्र में मूल्य संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसकी पहली खेप गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में लगभग 3,000 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची गई।’’
उन्होंने कहा कि मूल्य संवर्धन को और प्रोत्साहित करने तथा असम की चाय के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ‘माचा चाय’ को भी परंपरागत एवं विशेष श्रेणी की चाय की पात्र श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
मंत्री ने कहा, ‘‘ परम्परागत और विशेष श्रेणी की चाय पर उत्पादन सब्सिडी 10 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 15 रुपये प्रति किलोग्राम की जाएगी।’’
बरुआ ने कहा, ‘‘ इसके अलावा, मान्यता प्राप्त निर्यात माध्यमों से सीधे निर्यात की जाने वाली निर्यातोन्मुख और प्रीमियम गुणवत्ता वाली ‘असम सीटीसी चाय’ के लिए तीन रुपये प्रति किलोग्राम की नई सब्सिडी शुरू की जाएगी, जिससे विदेशी मुद्रा आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।’’
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार, असम चाय उद्योग विशेष प्रोत्साहन योजना (एटीआईएसआईएस) के माध्यम से चाय उत्पादकों को दी जाने वाली सहायता को और मजबूत करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘ इसके अलावा, हम चाय बागान क्षेत्रों में अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के साथ जांच सुविधाओं, दवाओं, उपकरणों तथा समर्पित चिकित्सकों और अन्य मानव संसाधनों की तैनाती के जरिये स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेंगे। संबंधित चाय बागान पहले की तरह इन अस्पतालों को अपना सहयोग देते रहेंगे।’’
भाषा निहारिका रमण
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