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नईदिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने शनिवार को ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, इससे अगले 5 साल में सामान और सर्विसेज के एक्सपोर्ट के दोगुना हो जाने की उम्मीद है। इस समझौते से जेम्स एंड ज्वेलरी कारोबार को बड़ा लाभ होने वाला है। एक तरफ जहां रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे, कारीगरों और डिजाइनर्स की मांग बढ़ेगी तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय आभूषणों को पहनकर ऑस्ट्रेलियन युवतियां भी इठलाती नजर आएंगी।
भारत एक ऐसा देश है जहां हाथ से ही ज्यादातर आभूषणों की डिजाइन बनाई जाती है। इस डील के बाद ऑस्ट्रेलिया अपने मार्केट में टेक्सटाइल, लेदर, ज्वेलरी और स्पोर्ट्स प्रोडक्ट्स जैसे 95 फीसदी भारतीय सामानों की ड्युटी फ्री एक्सेस उपलब्ध कराएगा। इस एग्रीमेंट से दोनों देशों के बीच के 27 बिलियन डॉलर के व्यापार को अगले पांच साल में 45-50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।
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जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल यानि जीजेईपीसी (GJEPC) ने शनिवार को कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (सीईसीए) दोनो देशों के बीच द्विपक्षीय रत्न और आभूषण (jewellery) कारोबार को 1.5 अरब डॉलर तक बढ़ाएगा और साथ ही इस समझौते से निर्यात (Export) अगले तीन वर्षों में दोगुना होने की संभावना है। वहीं इससे भारतीय कारोबारियों को जड़े हुए आभूषणों के कारोबार में नए अवसर मिलेंगे। रत्न और आभूषण क्षेत्र में 2022 तक 8.23 मिलियन लोगों को रोजगार देने की संभावना है।
जीजेईपीसी के अध्यक्ष कॉलिन शाह ने कहा कि भारत यूएई सीईपीए के जरिये कारोबारियों को मध्य पूर्व में ठोस सोने के आभूषणों के लिये अवसर मिलेंगे वहीं ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते से जड़े हुए आभूषणों के कारोबार में बढ़त मिलने की उम्मीद है। इस समझौते से द्विपक्षीय रत्न और आभूषण व्यापार वर्तमान में 95 करोड़ अमरीकी डॉलर से बढ़कर 1.5 बिलियन अमरीकी डॉलर हो जाएगा। वहीं ऑस्ट्रेलिया को भारत का रत्न और आभूषण निर्यात भी अगले तीन वर्षों में मौजूदा 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर से दोगुना होने की संभावना है।
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Gems and jewellery exports: आंकड़ों की बात करें तो देश में चालू वित्त वर्ष के पहले 10 माह (अप्रैल-जनवरी) के दौरान देश का रत्न एवं आभूषण निर्यात 6.5 प्रतिशत बढ़कर 32.37 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष के अंत तक 40 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाएगा। इस इंडस्ट्री से भारत के कुल जीडीपी का लगभग 7 फीसदी योगदान आता है और 50 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिलता है।
बजट 2022 ने इस क्षेत्र की वृद्धि और वैश्विक रत्न एवं आभूषण कारोबार में भारत की मौजूदगी बढ़ाने की राह प्रशस्त की है। कॉमर्स मिनिस्ट्री की माने तो भारत के जेम्स और ज्वेलरी को दुनिया में अग्रणी उद्योग बनाने के लिए केंद्र ने चार प्वाइंट्स बनाया है।
1. प्रोडक्ट्स के कीमत को बढ़ाने और मैन्यूफैक्चरिंग को अधिक लाभदायक बनाने के लिए डिजाइन (पेटेंट डिजाइन का निर्माण) पर ध्यान दें।
2. मोती, चांदी, प्लेटिनम, सिंथेटिक पत्थर, कृत्रिम हीरे, फैशन के आभूषण, गैर-सोने के जौहरी आदि जैसे उत्पादों पर जोर।
3. फ्यूजन ज्वैलरी के उत्पादन को बढ़ाने के लिए लागत प्रभावी तरीकों के लिए अन्य देशों के साथ सहयोग।
4. लैब-ग्रो डायमंड को बढ़ावा देना, क्यों कि ये डायमंड पर्यावरण के अनुकूल और किफायती हैं और भारत के निर्यात में योगदान देंगे और साथ ही रोजगार पैदा करेंगे।
इनके अलवा सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन के लिए रत्न और आभूषण क्षेत्र को फोकस क्षेत्र के रूप में घोषित किया है, सरकार ने इस क्षेत्र के विकास के लिए इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए कई उपाए किए हैं, जिसमें संशोधित स्वर्ण मुद्रीकरण योजना, सोने के आयात शुल्क में कमी और अनिवार्य हॉलमार्किंग शामिल है।