वाहन कंपनियों को ईवी सब्सिडी बंद होने के लिए तैयार रहना होगाः भारी उद्योग सचिव

वाहन कंपनियों को ईवी सब्सिडी बंद होने के लिए तैयार रहना होगाः भारी उद्योग सचिव

वाहन कंपनियों को ईवी सब्सिडी बंद होने के लिए तैयार रहना होगाः भारी उद्योग सचिव
Modified Date: September 3, 2026 / 06:03 pm IST
Published Date: September 3, 2026 6:03 pm IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिजवी ने बृहस्पतिवार को कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अगले कुछ वर्षों में सरकारी सब्सिडी और समर्थन का दौर खत्म हो जाएगा लिहाजा वाहन कंपनियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।

रिजवी ने वाहन विनिर्माताओं के संगठन (सियाम) के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए वाहन उद्योग को मिलकर चार्जिंग बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। उन्होंने वाहन एवं कलपुर्जा विनिर्माताओं से शोध एवं विकास (आरएंडडी) पर खर्च बढ़ाने को भी कहा।

रिजवी ने कहा कि सरकार के समर्थन से भारत इलेक्ट्रिक परिवहन के क्षेत्र में आगे बढ़ा है, लेकिन अगले चार-पांच साल में कई चुनौतियां सामने आएंगी। उन्होंने कहा, ‘‘सबसे पहली बात यह होगी कि सब्सिडी और सरकार का समर्थन खत्म हो जाएगा। कुछ क्षेत्रों में यह पहले ही बंद हो चुका है।’’

उन्होंने बताया कि भारत में कुल तिपहिया बिक्री में ई-तिपहिया की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है, जो 2026 के लिए तय 10 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी अधिक है। अगले दो-तीन साल में यह हिस्सेदारी 75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

कुल बिकने वाले दोपहिया वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहन की हिस्सेदारी करीब सात प्रतिशत है, जबकि कारों में यह करीब चार-पांच प्रतिशत है।

रिजवी ने इलेक्ट्रिक बस के क्षेत्र में भी बड़ी संभावनाएं बताते हुए कहा कि इनकी मांग और आपूर्ति में काफी अंतर है। उन्होंने कहा कि वाहन कंपनियों को देश में चार्जिंग बुनियादी ढांचा तैयार करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने 60 उच्च प्राथमिकता वाले गलियारों में विद्युतीकरण के लिए 2,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। उन्होंने कहा कि अगले दो-तीन वर्षों में महत्वपूर्ण राजमार्गों पर चार्जिंग अवसंरचना पर्याप्त स्तर तक पहुंच जानी चाहिए।

रिजवी ने शोध एवं विकास पर जोर देते हुए कहा कि मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियां अनुसंधान पर अधिक खर्च कर सकती हैं। इससे नवाचार की अवधि कम होगी और उद्योग नई प्रौद्योगिकी को तेजी से अपना सकेगा।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने इस कार्यक्रम में कहा कि भविष्य में ईंधन और पावरट्रेन के विकल्पों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए उद्योग और सरकार को मिलकर काम करना होगा।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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