घरेलू उड़ानों के लिए विमानन ईंधन की कीमतें स्थिर;वाणिज्यिक एलपीजी,पांच किलोग्राम सिलेंडर के दाम बढ़े

घरेलू उड़ानों के लिए विमानन ईंधन की कीमतें स्थिर;वाणिज्यिक एलपीजी,पांच किलोग्राम सिलेंडर के दाम बढ़े

घरेलू उड़ानों के लिए विमानन ईंधन की कीमतें स्थिर;वाणिज्यिक एलपीजी,पांच किलोग्राम सिलेंडर के दाम बढ़े
Modified Date: May 1, 2026 / 03:24 pm IST
Published Date: May 1, 2026 3:24 pm IST

नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) घरेलू विमानन कंपनी के लिए विमान ईंधन की कीमतों में शुक्रवार को कोई बदलाव नहीं किया गया। इससे इन कंपनियों को राहत मिली। हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में उछाल के साथ वाणिज्यिक एलपीजी और पांच किलोग्राम के सिलेंडर की कीमतों में अब तक की सबसे अधिक बढ़ोतरी की गई।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत 76.55 डॉलर प्रति किलोलीटर (5.33 प्रतिशत) बढ़ाकर 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर कर दी है।

इसके साथ ही, होटल एवं रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले 19-किलोग्राम के वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत 993 रुपये बढ़ाकर रिकॉर्ड 3,071.50 रुपये कर दी गई। पांच किलोग्राम एफटीएल या बाजार मूल्य वाले एलपीजी सिलेंडर की दरें 549 रुपये से बढ़ाकर 810.50 रुपये प्रति सिलेंडर कर दी गईं।

अब पांच किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के रसोई गैस सिलेंडर (जिसे घरेलू एलपीजी कहा जाता है) की 913 रुपये की कीमत से थोड़ा ही कम रह गई है।

इसके अलावा, दूरसंचार सिग्नल टावर जैसे औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले थोक डीजल की कीमत लगभग 137 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 149 रुपये प्रति लीटर से अधिक कर दी गई। यह कीमत पेट्रोल पंप पर उपलब्ध 87.62 रुपये प्रति लीटर डीजल की तुलना में अधिक है।

घरेलू विमानन कंपनियों के लिए विमान ईंधन की कीमत 1,04,927.18 रुपये प्रति किलोलीटर पर स्थिर रखी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने विमानन कंपनियों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए वैश्विक ईंधन कीमतों में वृद्धि को स्वयं वहन करने का निर्णय लिया है।

अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए दरें एक अप्रैल को दोगुनी से अधिक 1,435.31 डॉलर प्रति किलोलीटर कर दी गई थी। तब भी तेल कंपनियों ने घरेलू विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमत में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी ही की थी। पश्चिम एशिया युद्ध से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण आवश्यक बढ़ोतरी को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा एटीएफ पर लिए गए इन निर्णयों से एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी घरेलू विमानन कंपनियों को राहत मिलेगी, जिन्होंने निर्धारित मासिक संशोधन से पहले ही क्षेत्र के ‘अत्यधिक दबाव’ में होने की बात कही थी।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने सरकार को लिखे पत्र में कहा था कि ‘‘ एटीएफ लागत में अभूतपूर्व वृद्धि ने विमानन कंपनियों के संचालन खर्च को 30-40 प्रतिशत से बढ़ाकर 55-60 प्रतिशत कर दिया है, जिससे संचालन पूरी तरह अव्यवहारिक हो गया है।’’

ये कीमतें विभिन्न राज्यों में वैट जैसे स्थानीय करों के आधार पर अलग-अलग होती हैं।

इन निर्णयों की घोषणा करते हुए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी (14.2 किलोग्राम सिलेंडर) की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में हाल की वृद्धि से घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।

देश में उपभोग होने वाले कुल ईंधन में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले केरोसिन समेत इन ईंधनों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

आईओसी ने बयान में कहा, ‘‘ कीमतों में संशोधन केवल चुनिंदा औद्योगिक वर्गों तक सीमित रखा गया है जो कुल खपत का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा हैं और जिनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुसार नियमित मासिक समायोजन के अंतर्गत होती हैं।’’

उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण के तहत आम जनता को प्रभावित करने वाले प्रमुख ईंधनों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर हैं जिनकी देश में कुल पेट्रोल-डीजल खपत में करीब 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 33 करोड़ घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बयान में कहा गया, ‘‘ घरेलू विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ (निर्धारित उड़ानों) की कीमत और राशन की दुकान पर मिलने वाले केरोसिन की कीमतों में भी कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।’’

कुल मिलाकर करीब 80 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे अधिकतर उपभोक्ताओं के लिए स्थिरता सुनिश्चित हुई है।

उसने कहा, ‘‘ थोक और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों (जो कुल खपत का एक प्रतिशत से भी कम हैं) की कीमतों में संशोधन किया गया है। थोक डीजल और अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमतों में वृद्धि की गई है।’’

साथ ही, लगभग चार प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कमी भी की गई है जो वैश्विक कीमतों की गतिशील प्रकृति को दर्शाती है।

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतें लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हुई हैं।

मार्च 2024 में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। वर्तमान में दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर है।

दुनिया भर में विमानन कंपनियां पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण विमान ईंधन आपूर्ति में कमी से उत्पन्न व्यवधानों का सामना कर रही हैं। वैश्विक ऊर्जा प्रवाह का एक महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य संघर्ष के तीसरे महीने में प्रभावी रूप से बंद है जिससे ईंधन उपलब्धता और आपूर्ति शृंखला पर दबाव बढ़ गया है।

भारत में विमान ईंधन की कीमतें दो दशक से अधिक पहले नियंत्रण मुक्त कर दी गई थीं और तब से ये अंतरराष्ट्रीय मानक कीमतों के अनुरूप तय होती हैं।

पश्चिम एशिया संकट के कारण हालांकि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल को देखते हुए सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतों में वृद्धि को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है।

घरेलू विमानन कंपनियों के लिए विमान ईंधन की कीमतें अपरिवर्तित रखने से सार्वजनिक क्षेत्र की आईओसी, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) को निश्चित रूप से ऐसे ईंधन की बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ेगा।

उन्हें पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी पर भी नुकसान हो रहा है।

रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार, उन्हें पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन पर होने वाले नुकसान को पिछली कमाई या भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के समय मिलने वाले मुनाफे से समायोजित करना होगा। घरेलू एलपीजी के लिए सरकार द्वारा नुकसान की भरपाई के लिए सब्सिडी दिए जाने की संभावना है।

भाषा निहारिका रमण

रमण


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