Vande Bharat: महा-डील से थमेगी फाइट? शांति समझौते पर इजरायल की खुली बगावत, आखिर नेतन्याहू ने ट्रंप को क्यों दिखाए तेवर?
US-Iran Proposed Peace Agreement News: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर सबसे बड़ी नाराजगी इजरायल में दिखाई दे रही है।
US-Iran Proposed Peace Agreement News/Image Credit: AI
- अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर इजरायल में नाराजगी दिखी है।
- इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने दो टूक कहा है कि हम अमेरिका के गुलाम नहीं हैं।
- मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने कहा- राष्ट्रपति ट्रम्प का कोई भी समझौता इजरायल पर लागू नहीं होगा।
US-Iran Proposed Peace Agreement News: नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर सबसे बड़ी नाराजगी इजरायल में दिखाई दे रही है। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने दो टूक कहा है कि हम अमेरिका के गुलाम नहीं हैं और राष्ट्रपति ट्रम्प का कोई भी समझौता इजरायल पर लागू नहीं होगा। वहीं रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने साफ कर दिया है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान, गाजा और सीरिया में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों से पीछे नहीं हटेगी। यानी अमेरिका और ईरान अगर रिश्ते सुधारने की कोशिश करते हैं, तब भी इजरायल अपनी सुरक्षा नीति बदलने के मूड में नहीं दिख रहा।
दरअसल इजरायल को डर है कि अगर ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध नरम किए गए और उसके फ्रीज फंड जारी हुए, तो तेहरान को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। (US-Iran Peace Agreement News) इससे ईरान का क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ सकता है। इजरायली रणनीतिकारों को आशंका है कि अतिरिक्त संसाधनों के साथ ईरान अपने सहयोगी गुटों और क्षेत्रीय नेटवर्क को फिर मजबूत कर सकता है। यही वजह है कि इजरायल चाहता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी बनी रहे और किसी भी तरह की ढील न दी जाए।
ईरानी मीडिया के मुताबिक प्रस्तावित समझौते के मसौदे में कई बड़े बिंदु शामिल हैं। युद्ध और सैन्य कार्रवाई रोकने की बात है, (US-Iran Peace Agreement News) होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने का प्रस्ताव है। ईरानी जहाजों और समुद्री व्यापार पर लगी पाबंदियां हटाने की बात है। ईरान के अरबों डॉलर के फ्रीज फंड जारी करने और प्रतिबंधों में राहत देने की प्रक्रिया शुरू करने का जिक्र है।
अगर 19 जून को जेनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर दस्तखत होते हैं, तो ये करीब पांच दशक बाद दोनों देशों के रिश्तों में सबसे बड़ा बदलाव होगा, लेकिन इजरायल के सख्त तेवर बता रहे हैं कि वो इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सतर्क नजर से देखेगा और (US-Iran Peace Agreement News) अगर उसे लगा कि ईरान परमाणु कार्यक्रम या क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर समझौते की भावना का उल्लंघन कर रहा है, तो इजरायल अमेरिका से अलग रुख अपनाने और अपने स्तर पर कड़े कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
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