‘विकसित भारत’ के लिए बैंक परिसंपत्ति वृद्धि दर को जीडीपी से 3.5 प्रतिशत अंक अधिक करें: रिपोर्ट

‘विकसित भारत’ के लिए बैंक परिसंपत्ति वृद्धि दर को जीडीपी से 3.5 प्रतिशत अंक अधिक करें: रिपोर्ट

‘विकसित भारत’ के लिए बैंक परिसंपत्ति वृद्धि दर को जीडीपी से 3.5 प्रतिशत अंक अधिक करें: रिपोर्ट
Modified Date: August 12, 2026 / 07:39 pm IST
Published Date: August 12, 2026 7:39 pm IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) देश के बैंकों को अगले दो दशक में अपनी परिसंपत्तियों में वृद्धि दर को बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर से 3.5-4 प्रतिशत अंक अधिक बनाए रखना होगा। इससे 2047 तक 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को समर्थन मिलेगा। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

‘विनिंग इन द एआई एरा: द न्यू प्लेबुक फॉर इंडियन बैंक्स’ (एआई के दौर में सफलता: भारतीय बैंकों के लिए नई रणनीति) शीर्षक से जारी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस वृद्धि के लिए 2047 तक भारतीय बैंकों की कुल परिसंपत्तियां करीब 45 लाख करोड़ डॉलर तक होने की जरूरत है। इसके साथ ही बैंकिंग परिसंपत्तियों और जीडीपी का अनुपात वित्त वर्ष 2024-25 के 0.9 गुना से बढ़ाकर 1.5 गुना करने का लक्ष्य रखना होगा।

उद्योग मंडल फिक्की, बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) और भारतीय बैंक संघ द्वारा एफआईबीएसी सम्मेलन 2026 में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकिंग परिसंपत्तियों के लिहाज से भारत फिलहाल चीन, यूरो क्षेत्र और अमेरिका से पीछे है।

हालांकि, यह अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकिंग परिसंपत्तियां 12.4 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि बाजार मूल्य पर जीडीपी में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यानी बैंकिंग परिसंपत्तियों की वृद्धि जीडीपी वृद्धि से 3.5 प्रतिशत अंक अधिक रही। जबकि वित्त वर्ष 2015-16 से 2024-25 के दशक में यह अंतर महज 0.2 प्रतिशत अंक था। यह दर्शाता है कि बैंकिंग क्षेत्र मजबूती के साथ इस बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक से जारी डिजिटलीकरण अभी तक बड़े पैमाने पर अपेक्षित उत्पादकता लाभ देने में सफल नहीं रहा है। भारतीय बैंकों की प्रौद्योगिकी पर लागत वित्त वर्ष 2015 से 6.1 गुना बढ़ी है और इसकी संचयी वार्षिक वृद्धि दर 18 प्रतिशत रही है। इसके बावजूद उद्योग का लागत-आय अनुपात 47.3 प्रतिशत से मामूली बढ़कर 48.6 प्रतिशत ही हुआ है।

हालांकि, हाल के वर्षों में क्षमता आधारित वृद्धि से वास्तविक उत्पादकता लाभ की ओर बदलाव के संकेत मिले हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई) संस्थानों को प्रत्येक संगठन के स्तर पर वैश्विक औसत की तुलना में 1.6 गुना अधिक साइबर हमलों का सामना करना पड़ता है। वहीं, किसी सुरक्षा कमजोरी के सामने आने से उसके पहले दुरुपयोग का पता चलने तक का अंतराल 17 गुना कम हो गया है।

भारत की केवल 38 प्रतिशत बीएफएसआई कंपनियां अपने सूचना प्रौद्योगिकी बजट का 10 प्रतिशत से अधिक साइबर सुरक्षा पर खर्च करती हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह अनुपात 76 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में कहा गया कि खुदरा ऋण में धोखाधड़ी का जोखिम अब भी ऊंचा बना हुआ है। बैंकों को धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन की क्षमता को ऋण जोखिम प्रबंधन के समान स्तर तक मजबूत करने के लिए अधिक प्रयास करने की जरूरत है।

बैंकों को पारंपरिक ऋण जोखिम से आगे बढ़कर धोखाधड़ी, परिचालन संबंधी मजबूती, साइबर सुरक्षा, भू-राजनीतिक और जलवायु जोखिमों पर भी अधिक ध्यान देना होगा।

भाषा रमण अजय

अजय


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