पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद बासमती चावल निर्यात स्थिर रहने की उम्मीद : रिपोर्ट

Ads

पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद बासमती चावल निर्यात स्थिर रहने की उम्मीद : रिपोर्ट

  •  
  • Publish Date - March 16, 2026 / 08:08 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 08:08 PM IST

मुंबई, 16 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बावजूद चालू और अगले वित्त वर्ष में बासमती चावल का निर्यात स्थिर रहने की उम्मीद है। वर्ष 2024-25 में दर्ज 60.6 लाख टन के मुकाबले निर्यात की मात्रा में दो प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। क्रिसिल रेटिंग्स ने सोमवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां एक ओर, ईरान जैसे प्रमुख बाज़ार में निर्यात प्रभावित होने की आशंका है, वहीं सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन जैसे अन्य क्षेत्रीय बाज़ारों से बढ़ती मांग इस गिरावट की भरपाई कर देगी।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बावजूद, भारत के बासमती चावल के निर्यात की मात्रा इस वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में स्थिर रहने की उम्मीद है, और पिछले वित्त वर्ष में दर्ज 60.6 लाख टन के निर्यात की तुलना में इसमें दो प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

जहाज़ों की उपलब्धता में कमी, पारगमन में लगने वाला अधिक समय और भुगतान से जुड़ी चुनौतियों जैसी लॉजिस्टिक बाधाओं के कारण बासमती चावल निर्यातकों का कार्यशील पूंजी चक्र लंबा होने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप कार्यशील पूंजी ऋण में वृद्धि होगी।

हालांकि, निर्यातक माल ढुलाई और बीमा लागत में होने वाली किसी भी वृद्धि का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे उन्हें अपनी परिचालन लाभप्रदता को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

भारत बासमती चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, जिसका वैश्विक बासमती चावल की कुल मात्रा में लगभग 85 प्रतिशत का योगदान है।

ईरान भारतीय बासमती चावल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। पिछले वित्त वर्ष में इस किस्म के कुल निर्यात में इसका हिस्सा 14 प्रतिशत था, जबकि अन्य पश्चिम एशियाई देशों का सामूहिक योगदान 70-72 प्रतिशत रहा।

चल रहे संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया है और इसका निर्यात पर, विशेष रूप से ईरान को होने वाले निर्यात पर, असर पड़ सकता है।

बासमती चावल के निर्यातक पश्चिम एशिया क्षेत्र में आपूर्ति पक्की करने के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बचने के लिए दूसरे रास्तों की भी तलाश कर रहे हैं।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय