आकाश ने उच्चतम न्यायालय में कहा, कंपनी में बायजू की 25.7 प्रतिशत हिस्सेदारी सुरक्षित रहेगी

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आकाश ने उच्चतम न्यायालय में कहा, कंपनी में बायजू की 25.7 प्रतिशत हिस्सेदारी सुरक्षित रहेगी

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 08:33 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 08:33 PM IST

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लि. (एईएसएल) ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में आश्वासन दिया कि चेन्नई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित याचिका के निपटान तक आकाश में बायजू की 25.7 प्रतिशत हिस्सेदारी सुरक्षित रहेगी।

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और आलोक आराधे की पीठ ने एईएसएल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमणियन द्वारा दिए गए इस बयान को दर्ज किया और बायजू की मूल कंपनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लि. (टीएलपीएल) को आकाश के राइट इश्यू के दूसरे चरण में भाग लेने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।

पीठ ने आदेश दिया, ‘‘आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लि. की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमणियन के बयान को दर्ज कर विशेष अनुमति याचिका का निपटारा किया जा सकता है कि तीन जनवरी, 2025 तक अपीलकर्ता के आकाश में 25.75 प्रतिशत शेयर अंतरिम आवेदन के निपटान तक सुरक्षित रहेंगे।’’

शीर्ष अदालत बायजू की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के हाल के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आकाश को अपने 240 करोड़ रुपये के राइट इश्यू की दूसरी किस्त जारी करने की अनुमति दी गई थी।

अपीलीय न्यायाधिकरण ने टीएलपीएल को दूसरी किस्त के लिए अभिदान को लेकर 17 फरवरी तक का समय भी दिया था।

यह विवाद आकाश द्वारा राइट इश्यू के माध्यम से कोष जुटाने के निर्णय से उत्पन्न हुआ है। इसे टीएलपीएल ने उत्पीड़न और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), बेंगलुरु में एक याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी।

आकाश में लगभग 25.7 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली टीएलपीएल वर्तमान में एनसीएलटी में दिवाला कार्यवाही से गुजर रही है।

पिछले वर्ष 28 अक्टूबर को, अपीलीय न्यायाधिकरण ने टीएलपीएल के अमेरिका स्थित सबसे बड़े कर्जदाता ग्लास ट्रस्ट की याचिका को खारिज करते हुए, कंपनी के राइट इश्यू के लिए एईएसएल की असाधारण आम बैठक (ईजीएम) को मंजूरी दे दी।

अपीलीय न्यायाधिकरण की चेन्नई स्थित दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि उसे ‘‘प्रथम दृष्टया मामले को बनाये रखने का कोई कारण नहीं दिखता।’’

टीएलपीएल की कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) में 90 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर रखने वाली ग्लास ट्रस्ट ने तर्क दिया था कि यदि एईएसएल की शेयर पूंजी बढ़ाने की अनुमति दी जाती है, तो इससे न केवल टीएलपीएल के शेयरों का मूल्यांकन घटेगा, बल्कि शेयरों का प्रतिशत भी कम हो जाएगा।

एईएसएल ने अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष कहा कि कंपनी को पूंजी की सख्त जरूरत है और उसके पास 3.5 लाख छात्र और 10,000 कर्मचारी हैं, जिसे इन खर्चों को पूरा करना है। इसके अलावा, एईएसएल, बायजू के खिलाफ चल रही दिवाला कार्यवाही का हिस्सा नहीं है, जिसकी इसमें केवल हिस्सेदारी है।

बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की पीठ ने दिवाला कार्यवाही से गुजर रही बायजू द्वारा 29 अक्टूबर, 2025 को निर्धारित ईजीएम पर रोक लगाने के लिए दायर दूसरी याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

शीर्ष अदालत ने भी तीन नवंबर को राइट इश्यू में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियों का लंबित कार्यवाही के अंतिम परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इसके बाद, टीएलपीएल ने राइट इश्यू के पहले चरण में अभिदान को पूंजी भेजी। हालांकि, आकाश ने विदेशी स्रोत से प्राप्त धनराशि को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए टीएलपीएल को शेयर आवंटित नहीं किए।

आकाश ने जब आठ जनवरी को दूसरी किस्त की घोषणा करते हुए नोटिस जारी किया, तो टीएलपीएल की शेयरधारिता लगभग 25.7 प्रतिशत की मूल हिस्सेदारी के बजाय 10.99 प्रतिशत दर्शाई गई।

अपीलीय न्यायाधिकरण तीन फरवरी को टीएलपीएल को दूसरी किस्त में अपनी मूल 25.7 प्रतिशत हिस्सेदारी तक के शेयरों के लिए आवेदन करने की अनुमति दी और आकाश को निर्देश दिया कि विवाद का निपटारा होने तक विशेष प्रस्ताव की आवश्यकता वाले किसी भी मामले को न उठाया जाए।

अपीलीय न्यायाधिकरण ने बाद में शेयर अभिदान की समयसीमा 17 फरवरी तक बढ़ा दी।

भाषा रमण अजय

अजय