नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने सोमवार को कहा कि अगले वर्ष एक अप्रैल से वाहन विनिर्माताओं को ईंधन दक्षता के कड़े मानदंडों का पालन करना होगा। इसका कारण कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता (कैफे तीन) मानकों के कार्यान्वयन की समय सीमा बढ़ाये जाने की संभावना नहीं है।
कुरैशी ने कहा कि एक अप्रैल, 2027 के बाद कार्यान्वयन की समय सीमा बढ़ाने की आवश्यकता संभवत: नहीं होगी, क्योंकि सरकार कैफे तीन मानदंडों पर वाहन उद्योग से जुड़े पक्षों के संपर्क में है और नियमित रूप से उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त कर उन्हें पूरी जानकारी दे रही है। कैफे तीन मानदंड एक अप्रैल, 2027 से 31 मार्च, 2032 तक लागू किये जाने का प्रस्ताव है।
नियमों को लेकर वाहन विनिर्माताओं के बीच मतभेद बने हुए हैं। छोटे कार विनिर्माता वजन और किफायत के आधार पर कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता मानदंडों में छूट की मांग कर रहे हैं, जबकि बड़े मूल उपकरण विनिर्माता अलग-अलग व्यवहार का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे सुरक्षा सुविधाओं से समझौता होगा।
मारुति सुजुकी और टोयोटा किर्लोस्कर जैसी कंपनियां छोटी कारों को छूट देने की वकालत कर रही हैं, वहीं टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंदै और किआ जैसी कंपनियां इसका विरोध कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कैफे तीन के मसौदा मानदंडों पर विचार-विमर्श करने के लिए 16 अप्रैल को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में बिजली, भारी उद्योग और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सहित विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के शामिल होने की संभावना है। इस बैठक का मकसद कॉरपारेट औसत ईंधन दक्षता नियमों को लागू करने से पहले आम सहमति प्राप्त करना है।
उन्होंने बताया कि अन्य नियमों के अलावा, कैफै-तीन के मसौदा मानदंडों में अधिक लचीली अनुपालन रूपरेखा का प्रस्ताव किया गया है। इसमें जुर्माने के मानदंडों को आसान बनाया गया है और उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों को पार करने वाले वाहन विनिर्माताओं को आपसी समझौते के आधार पर कम कार्बन क्रेडिट जमा करने वाले विनिर्माताओं के साथ अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट व्यापार की अनुमति दी गई है।
सूत्रों ने बताया कि मसौदा मानदंडों में यह भी प्रस्ताव है कि मूल उपकरण निर्माता ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) से ‘क्रेडिट’ खरीदकर किसी भी प्रकार की कमी की भरपाई कर सकते हैं।
भाषा रमण अजय
अजय