मार्च में खाद्य तेल आयात 12 प्रतिशत बढ़कर 11.73 लाख टन पर : एसईए

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मार्च में खाद्य तेल आयात 12 प्रतिशत बढ़कर 11.73 लाख टन पर : एसईए

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  • Publish Date - April 13, 2026 / 07:11 PM IST,
    Updated On - April 13, 2026 / 07:11 PM IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) कच्चे पाम तेल के ज़्यादा खेप की वजह से मार्च में भारत का खाद्य तेल का आयात सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 11.73 लाख टन हो गया।उद्योग निकाय एसईए ने यह जानकारी दी है।

एसईए के अनुसार, आने वाले महीनों में वैश्विक कीमतों में तेज़ी और पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ज़्यादा माल ढुलाई की लागत की वजह से आयात कम हो सकता है।

सोमवार को जारी एक बयान में, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एसईए) ने कहा कि खाद्य तेलों का आयात मार्च में बढ़कर 11,73,168 टन हो गया, जो एक साल पहले इसी समय में 10,45,281 टन था।

एसईए आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने कच्चे पामतेल का आयात बढ़कर 6,73,965 टन हो गया, जो मार्च, 2025 में 3,43,949 टन था।

अखाद्य तेल का आयात 27,742 टन से घटकर 13,401 टन रह गया।

वनस्पति तेल (खाद्य और अखाद्य दोनों मिलाकर) का आयात पिछले महीने 11 प्रतिशत बढ़कर 11,86,569 टन हो गया, जो मार्च, 2025 में 10,73,023 टन था।

भारत पामतेल इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात करता है, जबकि सोयाबीन तेल अर्जेंटीना और ब्राज़ील से आता है। देश अपनी आधी से ज़्यादा घरेलू मांग आयात से पूरी करता है।

विपणन वर्ष 2025-26 के पहले पांच महीनों के दौरान, कुल वनस्पति तेल का आयात आठ प्रतिशत बढ़कर 65,72,131 टन हो गया, जो पिछले साल इसी समय में 60,96,923 टन था। खाद्य तेल का विपणन साल नवंबर से अक्टूबर तक चलता है।

एसईए ने कहा, ‘‘आगे चलकर, जब तक वैश्विक कीमतें कम नहीं होतीं या मुद्रा की हालत में सुधार नहीं होता, तब तक अल्पावधि में आयात कम रहने की संभावना है।’’

एसोसिएशन ने कहा कि लंबे समय में, भारत भू-राजनीतिक जोखिम को कम करने के लिए घरेलू तिलहन उत्पादन और स्रोतों के विवधीकरण पर ज़्यादा ध्यान केन्द्रित करने के साथ आयात को संतुलित करना जारी रख सकता है।

एसईए ने बताया कि मार्च, 2026 में खाद्य तेल का आयात पिछले महीने के 12.92 लाख टन से 10 प्रतिशत घटकर 11.73 लाख टन रह गया।

एसोसिएशन ने कहा, ‘‘मार्च में मासिक आधार पर गिरावट से पता चलता है कि ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये में गिरावट और खासकर सरसों की फसल से घरेलू उपलब्धता के कारण मांग में साफ सुधार हुआ है।’’

एसईए ने कहा कि दिसंबर, 2025 से फरवरी, 2026 के दौरान आयात में तेज़ बढ़ोतरी, वैश्विक आपूर्ति में रुकावटों की चिंताओं के बीच आयातकों द्वारा अपना माल अग्रिम में मंगाने की इशारा करती है, खासकर रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे विवाद के कारण जो सूरजमुखी के तेल पर असर डाल रहा है।

इसने कहा कि इसके अलावा, बड़े उत्पादक देशों में जैव-ईंधन की ओर झुकाव सहित मज़बूत वैश्विक मांग ने कीमतों को स्थिर रखा है, जिससे भारतीय रिफाइनरी कंपनियां सावधानी से ‘देखों और इंतजार करो’ का तरीका अपना रही हैं।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय