नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के. संजय मूर्ति ने बुधवार को कहा कि संस्था ने सार्वजनिक लेखा-परीक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक ‘विशाल भाषा मॉडल’ (एलएलएम) आधारित मंच के विकास की दिशा में काम तेज कर दिया है।
मूर्ति ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के 17वें स्थापना दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि एलएलएम पर आधारित इस मंच के विकास की पहल लेखा-परीक्षा (ऑडिट) की गुणवत्ता, गति और विश्लेषण क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित एलएलएम मंच एक ‘सरकारी एआई प्रणाली’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो ऑडिट अधिकारियों को जोखिम क्षेत्रों की पहचान, ऑडिट योजना बनाने, प्रणालीगत कमजोरियों का पता लगाने और संस्थागत ज्ञान साझा करने में मदद करेगा।
उन्होंने बताया कि आधुनिकीकृत लेखा-परीक्षा व्यवस्था के तहत कृत्रिम मेधा (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित उपकरणों का उपयोग कर बड़े डेटा सेट का विश्लेषण किया जाएगा। इसके जरिये बोलियों में बार-बार होने वाले दोहराव, संदिग्ध विक्रेता समूह, असामान्य मूल्य समानता, सीमित प्रतिस्पर्धा और ठेकों में केंद्रीकरण जैसी प्रवृत्तियों की पहचान पहले से कहीं अधिक तेजी से की जा सकेगी।
देश के शीर्ष लेखा-परीक्षा अधिकारी मूर्ति ने कहा कि आगे चलकर यह प्रणाली लगभग वास्तविक समय में खरीद प्रक्रियाओं में केंद्रीकरण और गिरोहबंदी के जोखिम संकेतकों की पहचान करने में सक्षम होगी। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों, भौगोलिक क्षेत्रों और ठेकेदार नेटवर्क के लिए ‘गतिशील जोखिम मानचित्र’ तैयार किए जा सकेंगे।
इसके अलावा, कैग भविष्य में जीएसटी प्रणाली, फास्टैग, लॉजिस्टिक आंकड़ा, खनन आपूर्ति, बिजली एक्सचेंज, परिवहन नेटवर्क और सार्वजनिक खरीद डेटाबेस जैसे क्षेत्रों में भी गहन विश्लेषण क्षमता विकसित करने की योजना बना रहा है।
मूर्ति ने कहा कि कैग की लेखा-परीक्षा अब अलग-अलग अनियमितताओं की जानकारी देने से कहीं आगे बढ़कर व्यापक और प्रणालीगत प्रवृत्तियों की पहचान पर केंद्रित हो रही है।
हर साल कैग के विभिन्न कार्यालय लगभग 20,000 से 25,000 निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करते हैं, जिनमें सरकारी खर्च, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, कराधान और खरीद से जुड़े लाखों ऑडिट अवलोकन शामिल होते हैं।
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