(फाइल फोटो के साथ)
मुंबई, 20 मई (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा आवश्यक है क्योंकि सौर एवं पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोत चौबीसों घंटे विश्वसनीय रूप से उपलब्ध नहीं होते।
फडणवीस ने यहां ‘टेकमहाइम्पैक्ट सीएसआर कॉन्क्लेव’ में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, ‘‘महाराष्ट्र, भारत में परमाणु ऊर्जा विस्तार के अगले चरण का नेतृत्व करेगा।’’
मुख्यमंत्री ने बताया कि कई विकसित देश तेजी से परमाणु ऊर्जा पर निर्भर हो रहे हैं और अमेरिका में लगभग 49 प्रतिशत बिजली उत्पादन परमाणु स्रोतों से होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ भारत की ऊर्जा आवश्यकताएं तेजी से बढ़ रही हैं। सौर एवं पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत बिजली प्रदान करते हैं लेकिन वे चौबिसों घंटे भरोसेमंद तरीके से उपलब्ध नहीं होते। इसलिए, ‘बेस-लोड पावर’ के लिए भारत को परमाणु ऊर्जा की आवश्यकता है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने परमाणु ऊर्जा के नागरिक उपयोग की अनुमति देने के लिए एक ढांचा तैयार किया है। महाराष्ट्र ने इस क्षेत्र में 25,000 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए पहले ही समझौते कर लिए हैं।
फडणवीस ने कहा कि कार्यक्रम में आने से पहले उन्हें जानकारी दी गई कि अमेरिकी वाणिज्य दूतावास लगभग 25 अमेरिकी वैश्विक परमाणु ऊर्जा और परमाणु निर्माण कंपनियों का एक प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र लाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘ दिल्ली में चर्चा के बाद उन्होंने महाराष्ट्र में एक सम्मेलन आयोजित किया। हमने उनके सामने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में महाराष्ट्र की भविष्य की योजनाएं प्रस्तुत कीं।’’
फडणवीस ने कहा कि कंपनियों ने राज्य के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने में रुचि दिखाई है।
उन्होंने कहा कि ट्रॉम्बे में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना के साथ महाराष्ट्र ने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में अग्रणी भूमिका निभाई है और वह एक बार फिर विस्तार के अगले चरण का नेतृत्व करेगा।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश यात्राओं और रणनीतिक समझौतों की सराहना वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा कि ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ जब प्रधानमंत्री विदेश यात्रा करते हैं, तो विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक समझौते किए जाते हैं। ये समझौते अगले 10 से 20 साल के लिए भारत का भविष्य सुरक्षित करते हैं।’’
भाषा निहारिका अजय
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