नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) स्पाइसजेट और उसके प्रवर्तक अजय सिंह ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि वे कारोबारी के. कलानिधि मारन और काल एयरवेज के साथ चल रहे कानूनी विवाद में अदालत की रजिस्ट्री में 45 दिन के भीतर 50 करोड़ रुपये जमा कर देंगे।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ को यह भी बताया गया कि शेष 94.50 करोड़ रुपये अगले 90 दिन में जमा कर दिए जाएंगे। अदालत ने पहले स्पाइसजेट और सिंह को इस मामले में लगभग 144 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था।
स्पाइसजेट के वकील ने उच्च न्यायालय को बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बीच एयरलाइन को केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मिली है और उसी के आधार पर पहली किस्त के रूप में 50 करोड़ रुपये जमा किए जाएंगे। इसके अलावा बाकी राशि 90 दिन में जमा करने की बात भी कही।
अदालत ने कंपनी के इस आश्वासन को दर्ज करते हुए मध्यस्थता निर्णय पर एयरलाइन की अपील पर सुनवाई नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। साथ ही 144 करोड़ रुपये जमा करने के मुद्दे पर सुनवाई के लिए मामले को सितंबर में भी सूचीबद्ध किया।
इससे पहले चार मई को अदालत ने स्पाइसजेट और अजय सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने 19 जनवरी के आदेश की समीक्षा की मांग की थी। उच्चतम न्यायालय ने 19 मई को एयरलाइन से समय बढ़ाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा था।
यह मामला वर्ष 2015 में स्पाइसजेट के स्वामित्व हस्तांतरण के बाद मारन के पक्ष में वारंट जारी नहीं किए जाने से जुड़े विवाद से संबंधित है। फरवरी, 2015 में मारन और काल एयरवेज ने स्पाइसजेट में अपनी 58.46 प्रतिशत हिस्सेदारी महज दो रुपये में अजय सिंह को हस्तांतरित कर दी थी।
मई, 2024 में उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें मध्यस्थता पंचाट के फैसले को बरकरार रखते हुए स्पाइसजेट और अजय सिंह को 579 करोड़ रुपये एवं ब्याज लौटाने को कहा गया था।
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