नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) देश में निवेश का माहौल और बेहतर बनाने के लिए सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के उन प्रस्तावों की सीमा 5,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15,000 करोड़ रुपये करने पर विचार कर रही है, जिन्हें आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की मंजूरी की जरूरत होती है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सीसीईए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति है। इसमें गृह मंत्री और वित्त मंत्री जैसे केंद्र सरकार के प्रमुख कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
मौजूदा एफडीआई नीति के मुताबिक अगर किसी निवेश प्रस्ताव में कुल विदेशी इक्विटी प्रवाह 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का होता है, तो संबंधित विभाग उस आवेदन को सीसीईए की मंजूरी के लिए भेजता है। इस सीमा से नीचे के प्रस्तावों पर संबंधित मंत्रालय ही फैसला ले लेते हैं।
मंजूरी की यह मौजूदा सीमा नवंबर, 2015 से लागू है और तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
सूत्रों ने बताया कि मौजूदा आर्थिक स्थितियों, महंगाई, पिछले वर्षों में निवेश के बढ़ते आकार और कारोबार सुगमता को बेहतर बनाने के मकसद को देखते हुए इस सीमा की समीक्षा करना जरूरी हो गया है।
इससे पहले सचिवों की एक समिति ने भी अपनी बैठक में सरकारी मंजूरी वाले रास्ते से आने वाले एफडीआई प्रस्तावों के लिए सीसीईए की सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया था।
सूत्रों का कहना है कि यह प्रस्ताव अभी चर्चा के दौर में है।
इसके अलावा, विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए सरकार अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़े नियमों को भी आसान बनाने पर विचार कर रही है।
भाषा पाण्डेय अजय
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