नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि सार्वजनिक ऋण में वृद्धि के कारण 2024-25 के दौरान केंद्र सरकार की कुल देनदारियां बढ़ गई हैं।
संसद में पेश की गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘2023-24 की तुलना में आंतरिक ऋण और बाहरी ऋण में क्रमशः 8.35 प्रतिशत और 9.83 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में आंतरिक ऋण 1,59,25,949 करोड़ रुपये रहा। बाजार ऋण, जो इसका प्राथमिक हिस्सा है, कुल आंतरिक ऋण का 69.96 प्रतिशत था।’’
रिपोर्ट के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में पूंजीगत व्यय 2023-24 के 2.78 प्रतिशत से मामूली रूप से घटकर 2024-25 में 2.70 प्रतिशत रह गया। कर्ज का पुनर्भुगतान भारत की संचित निधि से होने वाली सबसे बड़ी निकासी रही, जो 2024-25 के दौरान कुल निकासी का 62.57 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व घाटा और राजकोषीय घाटा दोनों में गिरावट आई है, जो विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन का संकेत है। वित्त वर्ष 2024-25 में राजस्व घाटा जीडीपी का 1.78 प्रतिशत था। इसमें वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में 26.24 प्रतिशत की कमी आई है, जो राजस्व व्यय पर बेहतर नियंत्रण और राजस्व प्राप्तियों में स्थिर वृद्धि को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में राजकोषीय घाटा 4.62 प्रतिशत रहा, जिसमें इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 8.27 प्रतिशत की कमी आई।
भाषा अजय पाण्डेय
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