छत्तीसगढ़: बस्तर क्षेत्र में ढाई साल में 31 नई बैंक शाखाएं खुलीं

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छत्तीसगढ़: बस्तर क्षेत्र में ढाई साल में 31 नई बैंक शाखाएं खुलीं

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  • Publish Date - May 8, 2026 / 04:45 PM IST,
    Updated On - May 8, 2026 / 04:45 PM IST

रायपुर, आठ मई (भाषा) छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका जो कभी माओवादी हिंसा संचार एवं बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा था, अब पिछले ढाई साल में 31 नई बैंक शाखाएं खुलने से एक बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है।

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि दूरदराज के आदिवासी और पहले माओवादी-प्रभावित इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार..बस्तर में बढ़ती शांति, जनता के भरोसे और विकास का एक अहम संकेत माना जा रहा है।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि बस्तर संभाग में अब बदलाव की एक नई कहानी लिखी जा रही है और पिछले ढाई साल में इस क्षेत्र में 31 नई बैंक शाखाएं खोला जाना इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है।

उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 में विष्णु देव साय सरकार बनने के बाद इस क्षेत्र में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ है। अब वित्तीय सेवाएं बस्तर संभाग के सभी सात जिलों बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर के अंदरूनी इलाकों तक पहुंच रही हैं।

अधिकारी ने बताया कि तर्रेम, जगरगुंडा, चिंतलनार, किस्टाराम, पामेड, समलवार और कोहकामेटा जैसे दूरदराज के इलाकों में नई शाखाएं खोली गई हैं। ये ऐसे इलाके थे जिन्हें कभी माओवाद के कारण दुर्गम माना जाता था।

इस वर्ष 31 मार्च को छत्तीसगढ़ को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित कर दिया गया था।

उन्होंने बताया कि पहले लोगों को बैंक से जुड़े कामों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी लेकिन अब सेवाएं गांव और ब्लॉक स्तर पर ही उपलब्ध हो रही हैं।

अधिकारी ने बताया कि बेहतर बैंकिंग नेटवर्क ने आदिवासी-बहुल बस्तर संभाग में वित्तीय समावेश की गति तेज कर दी है। इससे लोग अब बैंक खाते, डिजिटल भुगतान, फसल ऋण, बीमा, पेंशन और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ आसानी से उठा पा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजनाएं, जैसे कि प्रधानमंत्री जन धन योजना, पीएम-किसान सम्मान निधि, तेंदू पत्ता बोनस भुगतान, वन धन योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन, अब सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।

अधिकारी ने बताया कि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी बैंकिंग एवं ऋण सुविधाओं तक आसान पहुंच से काफी लाभ हुआ है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका से जुड़ी गतिविधियों और छोटे उद्यमों को बढ़ावा मिला है।

उन्होंने बताया कि गांवों में यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, माइक्रो-एटीएम और आधार-सक्षम भुगतान प्रणालियों के माध्यम से डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहा है।

अधिकारी ने बताया कि बैंकिंग के विस्तार से स्थानीय युवाओं के बीच स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए नए रास्ते भी खुले हैं।

अधिकारी ने कहा, ‘‘ यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं है बल्कि यह इस क्षेत्र के बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य का एक प्रतिबिंब है।’’

भाषा संजीव राजकुमार निहारिका

निहारिका