भारत विमानों को पट्टे पर देने में एक प्रमुख केंद्र बनने का इच्छुकः विमानन मंत्री

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भारत विमानों को पट्टे पर देने में एक प्रमुख केंद्र बनने का इच्छुकः विमानन मंत्री

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  • Publish Date - May 8, 2026 / 05:17 PM IST,
    Updated On - May 8, 2026 / 05:17 PM IST

गांधीनगर, आठ मई (भाषा) नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने शुक्रवार को कहा कि भारत विमानों को पट्टे पर देने वाले वैश्विक लीजिंग केंद्रों से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उनके पूरक के रूप में काम करते हुए मजबूत घरेलू परिवेश विकसित करने पर ध्यान दे रहा है।

नायडू ने यहां गिफ्ट सिटी में आयोजित ‘इंडिया एयरक्राफ्ट लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट 2.0’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र तेज रफ्तार से बढ़ रहा है और यह न केवल देश बल्कि आसपास के क्षेत्र को भी सक्षम बना सकता है।

उन्होंने कहा, ‘वैश्विक विमान पट्टा बाजार, खासकर भारत से जुड़े हिस्से का आकार इतना बड़ा है कि दुनिया की कई निजी कंपनियां इसका हिस्सा बन सकती हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ते परस्पर जुड़ाव के कारण विभिन्न क्षेत्रीय केंद्र विकसित हो सकते हैं। भारत भी इस क्षेत्र में एक मजबूत वैश्विक खिलाड़ी बनना चाहता है लेकिन इसके साथ हम मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पूरक भी बनना चाहते हैं।’

नायडू ने बताया कि भारत फिलहाल घरेलू नागर विमानन के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है और मौजूदा रफ्तार को देखते हुए वैश्विक स्तर पर भी तीसरे स्थान पर पहुंचने की दिशा में अग्रसर है।

नायडू ने कहा कि देश में वाणिज्यिक विमानों का बेड़ा 2027 तक 1,100 और 2032 तक बढ़कर 2,250 विमान हो जाने की उम्मीद है। वर्ष 2026 में अब तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर यात्री संख्या 19.1 करोड़ तक पहुंच चुकी है।

उन्होंने कहा कि गिफ्ट सिटी स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) को विमानों को पट्टे पर देने यानी लीजिंग का एक पूर्ण-विकसित वैश्विक केंद्र बनाने की जरूरत है, जहां विमान लीजिंग से जुड़े लेन-देन की संरचना, निष्पादन और प्रबंधन देश के भीतर ही हो।

नायडू ने कहा कि सरकार गिफ्ट सिटी में कानूनी एवं कर सुधारों, विवाद समाधान प्रणाली एवं वित्तपोषण ढांचे को मजबूत करने पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकारी प्रयासों के परिणाम भी सामने आए हैं और दिसंबर 2025 तक गिफ्ट आईएफएससी में 38 विमान पट्टा कंपनियां पंजीकृत हो चुकी हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण