चीन का डब्ल्यूटीओ से सौर उपकरणों को समर्थन को लेकर भारत के खिलाफ समिति गठित करने का आग्रह

चीन का डब्ल्यूटीओ से सौर उपकरणों को समर्थन को लेकर भारत के खिलाफ समिति गठित करने का आग्रह

चीन का डब्ल्यूटीओ से सौर उपकरणों को समर्थन को लेकर भारत के खिलाफ समिति गठित करने का आग्रह
Modified Date: May 12, 2026 / 09:21 pm IST
Published Date: May 12, 2026 9:21 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) चीन ने सौर सेल, मॉड्यूल और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए दिये जा रहे समर्थन उपायों को लेकर भारत के खिलाफ दायर मामले में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के विवाद निपटान निकाय से एक समिति गठित करने का अनुरोध किया है।

चीन ने आपसी सहमति से विवाद के निपटान के लिए मामला दायर किया था। द्विपक्षीय परामर्श की विफलता के बाद यह अनुरोध पिछले वर्ष दिसंबर में किया गया है।

आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने के उद्देश्य से 10 फरवरी, 2026 को परामर्श बैठक हुई थी।

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने एक बयान में कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, परामर्श बैठक से विवाद का समाधान नहीं हो सका। इसलिए, चीन ने समिति के गठन के लिए अनुरोध किया है।’’

चीन का आरोप है कि कुछ प्रौद्योगिकी उत्पादों पर भारत द्वारा लगाया गया शुल्क या आयात शुल्क और आयातित वस्तुओं के स्थान पर घरेलू उत्पादों के उपयोग जैसे उपाय चीनी वस्तुओं के साथ भेदभाव करते हैं।

चीन इन वस्तुओं का एक प्रमुख निर्यातक है। उसने दावा किया है कि ये समर्थन उपाय और प्रोत्साहन डब्ल्यूटीओ के शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौते 1994, सब्सिडी और प्रतिपूरक उपायों पर समझौते और व्यापार-संबंधित निवेश उपायों पर समझौते से संबंधित नियमों का उल्लंघन करते हैं।

डब्ल्यूटीओ नियमों के अनुसार, विवाद निपटान प्रक्रिया का पहला चरण परामर्श मांगना है।

यदि भारत के साथ किए गए परामर्श से कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो चीन डब्ल्यूटीओ से इस मामले में एक समिति गठित करने का अनुरोध कर सकता है ताकि उठाए गए मुद्दे पर निर्णय लिया जा सके।

चीन, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

चीन ने जनवरी में भी डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान निकाय से एक अन्य मामले में समिति गठित करने का अनुरोध किया था। उसने यह मामला भारत के खिलाफ वाहन, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं को लेकर दायर किया था, क्योंकि द्विपक्षीय परामर्श से विवाद का समाधान नहीं हो पाया था।

भाषा रमण अजय

अजय


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