सरकार का 2031 तक खाद्य प्रसंस्करण का स्तर 25 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य

सरकार का 2031 तक खाद्य प्रसंस्करण का स्तर 25 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य

सरकार का 2031 तक खाद्य प्रसंस्करण का स्तर 25 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य
Modified Date: July 16, 2026 / 06:48 pm IST
Published Date: July 16, 2026 6:48 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) खाद्य प्रसंस्करण सचिव अविनाश जोशी ने बृहस्पतिवार को कहा कि मंत्रालय ने वर्ष 2023 में 17 प्रतिशत से खाद्य प्रसंस्करण के स्तर को वर्ष 2031 तक 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने संकेत दिया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के मकसद से कुछ नीतिगत पहल की घोषणा की जाएगी।

उद्योग संगठन फिक्की द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि खाद्य प्रसंस्करण का स्तर वर्ष 2010-11 के 10 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 17 प्रतिशत हो गया है।

सचिव ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की सफलता के बारे में भी जानकारी दी, जिससे क्षमता बढ़ाने और रोजगार पैदा करने में मदद मिली है। यह योजना वर्ष 2021-22 से वर्ष 2026-27 तक छह वर्षों के लिए लागू की जा रही है, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये है।

जोशी ने कहा, ‘‘दो सप्ताह पहले, हमें देश में प्रसंस्करण के स्तर के बारे में क्रिसिल से एक रिपोर्ट मिली थी। वर्ष 2010-11 में, हमारा प्रसंस्करण स्तर लगभग 10 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में प्रसंस्करण स्तर बढ़कर 17 प्रतिशत हो गया है। हमने आंतरिक रूप से इसे वर्ष 2031 तक कम से कम 25 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।’’

सचिव ने कहा कि प्रसंस्करण स्तर एक महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उद्योग इस लक्ष्य को एक चुनौती के रूप में लेगा।

उन्होंने कहा कि प्रसंस्करण स्तर में वृद्धि से मूल्य संवर्धन में मदद मिलेगी, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और प्राथमिक, माध्यमिक तथा तृतीयक क्षेत्र के बाजार के लिए भी कई सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

जोशी ने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले, हमें फिर से प्रधानमंत्री से बात करने का मौका मिला। तो वहां, खाद्य प्रसंस्करण के नजरिये से हमने कहा कि प्रसंस्करण के स्तर को कम से कम 25 प्रतिशत तक ले जाने के लिए, हमें किसी राष्ट्रीय प्रसंस्करण मिशन या पीएलआई 2.0 या जो भी नाम हम इस योजना को दें, उसकी जरूरत है, क्योंकि इस क्षेत्र में बहुत कम समय में ज्यादा निवेश की आवश्यकता है।

भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में 90 प्रतिशत से ज़्यादा इकाइयां सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में हैं।

जोशी ने उद्योग से कहा कि वे कमियों को दूर करें और भारत को न सिर्फ़ घरेलू बाज़ार के लिए बल्कि वैश्विक बाज़ार के लिए भी प्रतिस्पर्धी बनाएं।

यह बताते हुए कि भारत में खेती का उत्पादन जरूरत से ज्यादा है, उन्होंने कहा कि चुनौती यह है कि तेजी से मात्रा से मूल्य की ओर बढ़ा जाए और फिर सबके लिए पोषण हासिल किया जाए।

सचिव ने इस बात पर भी जोर दिया कि खाद्य सुरक्षा सबसे जरूरी है। ‘‘हम सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं कर सकते, और हमें करना भी नहीं चाहिए।’’

मौजूदा पीएलआई योजना पर, जोशी ने कहा कि मंत्रालय ने हाल ही में उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की ताकि इसकी खूबियों और चुनौतियों को समझा जा सके।

उन्होंने इस योजना को देश की सबसे सफल पीएलआई योजना बताया क्योंकि इसने रोजगार पैदा करने, निवेश लाने और निर्यात समेत सभी लक्ष्य हासिल किए हैं।

उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में पीएलआई ने रोजगार पैदा करने में लगभग 48 प्रतिशत योगदान दिया है और यह बहुत ही समावेशी क्षेत्र है।

जोशी ने कहा कि सरकार ने प्रसंस्कृत खाद्य के लिए ‘भारत ब्रांड’ बनाने पर काम शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इस ‘भारत ब्रांड’ मंच के जरिये भारतीय व्यंजनों और भारतीय अल्कोहल वाले पेय को पहचान दिलाना चाहते हैं। हमारी योजना है कि उद्योग की मदद से मंत्रालय कई कदम उठाए, जिससे भारतीय भोजन और भारतीय व्यंजनों के लिए सकारात्मक माहौल बन सके और हम इसे वैश्विक स्तर पर ले जा सकें।’’

सचिव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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