कोफोर्ज के स्वतंत्र निदेशक डी के सिंह ने दिया इस्तीफा, बोर्ड में ‘मतभेद और तनाव’ का आरोप लगाया
कोफोर्ज के स्वतंत्र निदेशक डी के सिंह ने दिया इस्तीफा, बोर्ड में ‘मतभेद और तनाव’ का आरोप लगाया
नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा कंपनी कोफोर्ज के गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक और नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (एनआरसी) के अध्यक्ष डी के सिंह ने स्वतंत्र और कार्यकारी निदेशकों के बीच ‘मतभेद और तनाव’ का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया।
हालांकि, कोफोर्ज ने सिंह के आरोपों को ‘निराधार’ और ‘बाद में गढ़ी गई बात’ करार दिया। कंपनी ने कहा कि सिंह का इस्तीफा एक आंतरिक ऑडिट समीक्षा के बाद हुआ, जिसमें बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया के संचालन में शासन संबंधी खामियों की तरफ संकेत किया गया था। इस प्रक्रिया को सिंह और पूर्व चेयरमैन ओ पी भट्ट ने संभाला था।
यह घटनाक्रम कोफोर्ज के चेयरमैन पद से भट्ट के अचानक इस्तीफा देने के कुछ दिन बाद हुआ है। आंतरिक ऑडिट के निष्कर्षों के अनुसार, भट्ट और सिंह ने बोर्ड के अन्य सदस्यों से बोर्ड मूल्यांकन की महत्वपूर्ण रिपोर्ट साझा नहीं की थीं। इनमें चेयरमैन की श्रेणी को मिली सबसे कम रेटिंग भी शामिल थी।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व चेयरमैन भट्ट को 24 अगस्त को कंपनी की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में स्वतंत्र निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए जरूरी 75 प्रतिशत मत हासिल नहीं हुए थे। उनके पक्ष में 65.47 प्रतिशत मत पड़े थे।
सिंह के इस्तीफे के बाद कोफोर्ज के बोर्ड ने अपनी समितियों का पुनर्गठन किया है। कंपनी ने नियामकीय सूचना में कहा कि गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक बेथ बूशर को एनआरसी का नया प्रमुख बनाया गया है।
विवेक शर्मा 31 जनवरी, 2027 तक अंतरिम चेयरमैन के रूप में काम करेंगे। वह अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति के लिए वैश्विक तलाश प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगे और 31 जनवरी, 2027 तक नए बोर्ड चेयरमैन के चुनाव की देखरेख करेंगे।
सिंह ने 10 सितंबर को लिखे ईमेल में कहा है कि पिछले कुछ सप्ताह की ‘दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं’ और भट्ट के जाने के बाद उन्हें लगा कि पद छोड़ने का यह उचित समय है।
सिंह ने कहा कि जब वह 2024 में बोर्ड में शामिल हुए थे, तब बोर्ड निजी इक्विटी के नेतृत्व वाले बोर्ड से अधिक स्वतंत्र बोर्ड में बदलाव के दौर में था। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सही दिशा में बढ़ रहा था, लेकिन इससे खासकर स्वतंत्र और कार्यकारी निदेशकों के बीच कुछ मतभेद और तनाव भी पैदा हुए।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र निदेशक की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण सवाल पूछना, स्वतंत्र निर्णय देना और कंपनी तथा उसके शेयरधारकों के दीर्घकालिक हित में फैसले करना है। सिंह ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां उनके लिए इन जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाना और जरूरी स्वतंत्र निर्णय लेना मुश्किल बना सकती हैं।
उन्होंने कहा कि नए बोर्ड सदस्यों के आने के साथ रणनीति, पारदर्शिता और पारिश्रमिक जैसे क्षेत्रों में दिशा और प्राथमिकताओं में बदलाव हो सकता है।
सिंह के इन आरोपों पर कोफोर्ज ने कहा, ‘‘आरोप निराधार हैं और यह बाद में गढ़ी गई बात प्रतीत होता है।’’ कंपनी ने कहा कि 2024 से बोर्ड ने करीबी सहयोग और सर्वसम्मति के साथ काम किया है।
कोफोर्ज ने स्पष्ट किया कि सिंह का इस्तीफा जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के बोर्ड मूल्यांकन अभ्यास को लेकर आंतरिक ऑडिटर द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद हुआ। कंपनी के अनुसार, बाहरी सर्वेक्षण एजेंसी से प्राप्त मूल्यांकन रिपोर्ट केवल भट्ट और सिंह को उपलब्ध कराई गई थीं। पूर्व की प्रक्रिया से अलग इस बार इनकी प्रतियां बोर्ड के अन्य सदस्यों को नहीं दी गईं।
कंपनी ने कहा कि बोर्ड के समक्ष पेश प्रस्तुति में सभी प्रासंगिक पहलुओं और निष्कर्षों का खुलासा नहीं किया गया था। इसमें यह तथ्य भी शामिल था कि चेयरमैन के प्रदर्शन की श्रेणी को मूल्यांकन में सबसे कम रेटिंग मिली थी।
योगेश प्रेम
प्रेम

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