लेह/जम्मू, 25 अगस्त (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने लद्दाख की नुब्रा घाटी में हिमालयी बेर (सी बकथॉर्न) के लिए खास राष्ट्रीय ‘संजीवनी’ शोध केंद्र बनाने के प्रस्ताव की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
हिमालयी बेर (सी बकथॉर्न) हिमालय में प्राकृतिक रूप से उगने वाला एक पौधा है। इसमें खेती, भोजन, न्यूट्रास्यूटिकल्स और प्रसंस्करण के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं, साथ ही यह ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के अवसर भी प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसके औषधीय और पोषण संबंधी गुणों पर प्रकाश डालने और इसे ‘संजीवनी’ कहने के बाद इस फसल ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।
लोक भवन के एक प्रवक्ता ने बताया कि उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 14 अगस्त को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर शोध केंद्र की स्थापना का अनुरोध किया था।
नुब्रा घाटी, जो लद्दाख में हिमालयी बेर (सी बकथॉर्न) का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है, में प्रस्तावित इस शोध केंद्र का उद्देश्य इस उच्च-मूल्य वाली हिमालयी फसल के अनुसंधान, विकास, मूल्य संवर्धन और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना है।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि उपराज्यपाल सक्सेना के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने 21 अगस्त को योजना की समीक्षा करने और एक उपयुक्त संस्थागत और परिचालन ढांचा सुझाने के लिए समिति का गठन किया।
आईसीएआर के बागवानी विज्ञान प्रभाग के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. वी.बी. पटेल की अध्यक्षता वाली समिति ने 24 अगस्त को लद्दाख का पहला क्षेत्र का दौरा किया और अंशधारकों तथा अधिकारियों के साथ बैठकें कीं।
भाषा राजेश राजेश अजय
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