मुंबई, नौ अप्रैल (भाषा) मुंबई की एक विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को एक स्थानीय क्रिकेट कोच की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिस पर 13 वर्षीय प्रशिक्षु लड़की का कई बार यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। अदालत ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए यह याचिका खारिज की।
यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष न्यायाधीश सुरेखा सिन्हा ने इस बात पर जोर दिया कि अगर आरोपी को रिहा किया जाता है तो उसके द्वारा नाबालिग लड़कियों के साथ इसी तरह का अपराध करने और फरार होने की आशंका है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, लड़की ने आरोप लगाया कि जब वह क्रिकेट की कोचिंग ले रही थी, तब आरोपी ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि बार-बार किए गए कृत्यों के कारण पीड़िता को गंभीर शारीरिक पीड़ा हुई। चिकित्सा साक्ष्य और दर्ज की गई प्राथमिकी को हमले के पुख्ता सबूत के रूप में पेश किया गया।
विशेष लोक अभियोजक एसएस शामकुवार ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी ने अभियोजन साक्ष्य को मिटाने के लिए घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों को कथित तौर पर नष्ट कर दिया था।
अभियोजन पक्ष ने 2023 में एक अन्य 16 वर्षीय पीड़िता द्वारा अपने 38 वर्षीय क्रिकेट कोच के खिलाफ दायर की गई एक पिछली शिकायत का हवाला दिया, जिसमें अनुचित स्पर्श और मर्यादा भंग करने के समान कृत्यों का आरोप लगाया गया था।
उसने चिंता व्यक्त की गई कि अगर पवार को रिहा किया जाता है, तो वह फरार हो सकता है या अन्य नाबालिग लड़कियों के खिलाफ अपराध दोहरा सकता है।
बचाव पक्ष के वकील दिलीप गावित ने दलील दी कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उन्होंने पीड़िता पर झूठी शिकायत दर्ज कराने का आरोप लगाया।
बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपी को पांच अगस्त, 2025 को गिरफ्तारी के बाद से आठ महीने से हिरासत में रखा गया है।
उसने कहा कि आरोपी अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है, जिसमें उसके बुजुर्ग माता-पिता भी शामिल हैं, जो अब भुखमरी का सामना कर रहे हैं।
बचाव पक्ष ने कहा कि यह शिकायत कोच द्वारा 2023 में किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत के जवाब में की गई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने पाया कि अपराध की प्रकृति गंभीर थी।
अदालत ने इस आरोप को भी स्वीकार किया कि आरोपी ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को गायब करने के लिए घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे को नष्ट कर दिया था।
अदालत ने कहा, “यदि इस स्थिति में आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया जाता है, तो नाबालिग लड़कियों के साथ अपराध दोहराए जाने और आरोपी के फरार होने की आशंका है।” उसने कहा कि इस स्थिति में, उसे जमानत पर रिहा करना न्यायसंगत और उचित नहीं है।
भाषा प्रशांत पारुल
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