राज्यों का एकीकृत राजकोषीय घाटा 2024-25 में 0.3 प्रतिशत बढ़कर 3.3 प्रतिशत: आरबीआई

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राज्यों का एकीकृत राजकोषीय घाटा 2024-25 में 0.3 प्रतिशत बढ़कर 3.3 प्रतिशत: आरबीआई

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  • Publish Date - January 23, 2026 / 10:07 PM IST,
    Updated On - January 23, 2026 / 10:07 PM IST

मुंबई, 23 जनवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में राज्यों का एकीकृत राजकोषीय घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.3 प्रतिशत हो गया है। इससे पहले तीन वित्त वर्षों में यह तीन प्रतिशत पर था।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसने इस वित्त वर्ष के लिए सभी राज्यों द्वारा पेश बजट का विश्लेषण किया है। केंद्र सरकार की राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत राज्यों ने अधिक मात्रा में 50 वर्षीय ब्याज मुक्त कर्ज लिया, जिसके चलते उनका घाटा बढ़ा।

आरबीआई ने कहा कि केंद्र सरकार की इस योजना के तहत पैसा लेना राज्यों की सामान्य शुद्ध ऋण सीमा के अतिरिक्त है।

रिपोर्ट के अनुसार पूंजीगत व्यय पर काफी जोर जारी रहा। यह 2023-24 और 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद के 2.7 प्रतिशत पर स्थिर रहा और 2025-26 के बजट में इसके 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

राज्य वित्त पर अपने अध्ययन में आरबीआई ने कहा कि महामारी के बाद के समय में राज्यों की एकीकृत बकाया देनदारियां उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, और इसके मार्च 2026 के अंत तक जीडीपी के मुकाबले 29.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

रिपोर्ट में जनसंख्या, विशेषकर आबादी की आयु, का राज्य के वित्त पर कुछ प्रभाव का भी जिक्र किया गया है।

इसके अनुसार, राज्य जनसांख्यिकीय संक्रमण के विभिन्न चरणों में हैं। युवा आबादी वाले राज्यों के पास बढ़ती कामकाजी आयु की जनसंख्या और मजबूत राजस्व जुटाने के कारण अवसरों के व्यापक अवसर है, जिसका लाभ मानव पूंजी में अधिक निवेश के माध्यम से उठाया जा सकता है। वहीं बुजुर्ग होती आबादी वाले राज्यों के लिए अवसर सीमित होते जा रहे हैं।

आरबीआई ने कहा कि बुजुर्ग होती आबादी वाले राज्यों के मामले में, घटते कर आधार और बढ़ते प्रतिबद्ध व्यय से राजकोषीय दबाव उत्पन्न हो रहे हैं। इसके लिए उच्च राजस्व क्षमता और स्वास्थ्य सेवा, पेंशन और कार्यबल नीतियों में सुधार की आवश्यकता है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि मध्यम आयु वर्ग के राज्यों को विकास प्राथमिकताओं और वृद्धावस्था के लिए प्रारंभिक तैयारी के बीच संतुलन बनाना होगा।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण