आंबेडकर के भित्तिचित्र का निर्माण सार्वजनिक परियोजना: उच्च न्यायालय

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आंबेडकर के भित्तिचित्र का निर्माण सार्वजनिक परियोजना: उच्च न्यायालय

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  • Publish Date - July 14, 2026 / 05:36 PM IST,
    Updated On - July 14, 2026 / 05:36 PM IST

मुंबई, 14 जुलाई (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि डॉ. भीम राव आंबेडकर के एक भित्तिचित्र का निर्माण एक ऐसी सार्वजनिक परियोजना है जो आने वाली पीढ़ियों की बौद्धिक और नैतिक बुनियाद को मजबूत करता है।

अदालत ने अमरावती में इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाले एक चिकित्सक की याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही।

उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि डॉ. आंबेडकर का प्रस्तावित भित्तिचित्र मौजूदा प्रतिमा का सौंदर्यात्मक महत्व बढ़ाने भर के लिए नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के द्वार खोलने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भी पूरा करेगा।

पीठ में न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे शामिल हैं।

अदालत ने कहा, ‘‘डॉ. आंबेडकर का भित्तिचित्र बनाना हमारी आने वाली पीढ़ियों की बौद्धिक और नैतिक बुनियाद में निवेश करने जैसा है। देश के लिए डॉ. आंबेडकर का योगदान – जिसमें समानता, न्याय और बंधुत्व की वकालत शामिल है – भारत के संवैधानिक ढांचे की नींव है।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि उनका ‘‘शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो जाओ’’ का संदेश आज भी लोगों को प्रेरित करता है और उनके विचार देश की लोकतांत्रिक प्रगति का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर को उद्धृत करते हुए अदालत ने कहा, ‘‘मनुष्य नश्वर हैं। विचार भी नश्वर होते हैं। किसी विचार का प्रसार करने की उतनी ही जरूरत होती है जितनी कि किसी पौधे को पानी देने की।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि डॉ. आंबेडकर को दर्शाने वाला एक भित्तिचित्र उनके विचारों को लोगों के बीच लंबे समय तक फैलाने का काम करेगा। साथ ही, यह नागरिकों, खासकर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और उन बुनियादी संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करेगा, जिन्हें उन्होंने प्रतिपादित किया था।

अदालत ने कहा, ‘‘इस तरह का भित्तिचित्र बनाना बेशक वर्तमान और भावी पीढ़ियों को प्रेरणा देकर समुदाय के कल्याण को बढ़ावा देता है। इस प्रकार, यह ‘लोक उद्देश्य’ की आवश्यक शर्त को पूरा करता है।’’

उच्च न्यायालय ने नासिक के रहने वाले चंद्रशेखर गट्टानी की याचिका खारिज कर दी। उन्होंने अमरावती के इर्विन स्क्वायर पर डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के आसपास के इलाके का सौंदर्यीकरण करने और उसे विकसित करने के सार्वजनिक उद्देश्य से अपनी 6,600 वर्ग फुट जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया को चुनौती दी थी।

यह प्रतिमा 1970 में निर्मित की गई थी।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश