मुंबई, आठ जुलाई (भाषा) ट्रांसयूनियन सिबिल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी भवेश जैन ने बुधवार को कहा कि बकाया भुगतान में चूक (डिलिंक्वेंसी) के स्तर में सुधार जैसे कई सकारात्मक कारकों के बावजूद विकसित ही नहीं बल्कि विकासशील देशों की तुलना में भी भारत में क्रेडिट कार्ड की पहुंच कम है।
जैन ने संवाददाताओं से कहा कि व्यापक ऋण परिवेश में इस उत्पाद का योगदान घटा है। नए जुड़े ग्राहकों में केवल आठ प्रतिशत ही ऐसे हैं जो पहली बार ऋण प्रणाली से जुड़े हैं, जबकि एक वर्ष पहले यह अनुपात 26 प्रतिशत था।
उन्होंने कहा कि भारत में 5.2 करोड़ लोगों के पास क्रेडिट कार्ड हैं, जो लगभग 25 करोड़ सक्रिय ऋण ग्राहकों की कुल संख्या का केवल 25 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि विकसित और विकासशील देशों में क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने वाले लोगों का अनुपात इससे अधिक है।
क्रेडिट सूचना कंपनी द्वारा तैयार एक श्वेतपत्र के अनुसार, यह अनुपात कोलंबिया में 62 प्रतिशत, हांगकांग में 98 प्रतिशत, अमेरिका में 81 प्रतिशत और ब्रिटेन में 70 प्रतिशत है।
श्वेतपत्र में कहा गया कि वर्षों में मुख्य रूप से उपभोग के लिए इस्तेमाल होने वाले क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए प्रमुख असुरक्षित ऋण उत्पाद नहीं रह गए हैं। इसके पीछे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई), व्यक्तिगत ऋण आदि जैसे विकल्प उपलब्ध होना है जिनसे इसकी प्रतिस्पर्धा है।
गौरतलब है कि वर्तमान में प्रत्येक क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर दो प्रतिशत तक का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाया जाता है। साथ ही, उपयोगकर्ताओं को लेनदेन पर ‘रिवॉर्ड प्वाइंट’ जैसे लाभ भी मिलते हैं।
वर्तमान में उपयोगकर्ता वीजा और मास्टरकार्ड जैसे अन्य नेटवर्क के क्रेडिट कार्ड को यूपीआई ऐप से नहीं जोड़ सकते, जिससे इसका उपयोग सरकार समर्थित रुपे तक सीमित रहता है।
पिछले एक दशक में कई मानकों पर वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान बकाया राशि 8.3 गुना होकर 3.1 लाख करोड़ रुपये हो गई, क्रेडिट कार्ड रखने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 3.6 गुना होकर 5.2 करोड़ हो गई और कार्डों की संख्या 5.1 गुना होकर 10.7 करोड़ रही।
श्वेतपत्र में कहा गया कि अपने बटुए में तीन या उससे अधिक क्रेडिट कार्ड रखने वाले लोगों का अनुपात एक दशक पहले के 12 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गया है। इसी अवधि में उपभोग ऋण में सक्रिय कार्डों की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत से घटकर 38 प्रतिशत रह गई है।
जैन ने कहा कि युवा आबादी के पास क्रेडिट कार्ड होने की संभावना अधिक है। हालांकि, भौगोलिक दृष्टि से दिलचस्प बात यह है कि अब क्रेडिट कार्ड केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अर्द्ध-शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी इन्हें रखने लगे हैं।
पोर्टफोलियो गुणवत्ता के दृष्टिकोण से श्वेतपत्र में कहा गया कि कोविड-19 वैश्विक महामारी संकट के दौरान जरूर कुछ व्यवधान आया था, लेकिन अब वह पीछे छूट चुका है और समग्र गुणवत्ता में सुधार देखा गया है।
इसके अनुसार, मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में 91 से 179 दिन तक बकाया रहने वाले क्रेडिट कार्ड ऋण का अनुपात घटकर 1.7 प्रतिशत रह गया, जो एक वर्ष पहले की समान अवधि में दो प्रतिशत था।
भाषा निहारिका मनीषा
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