गलती से ‘वन टाइम पासवर्ड’ साझा करने पर भी ग्राहकों को मिलेगी 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति

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गलती से ‘वन टाइम पासवर्ड’ साझा करने पर भी ग्राहकों को मिलेगी 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति

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  • Publish Date - February 6, 2026 / 05:37 PM IST,
    Updated On - February 6, 2026 / 05:37 PM IST

मुंबई, छह फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को डिजिटल धोखाधड़ी में हो रही बढ़ोतरी के बीच ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले लेनदेन के लिए 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति देने की घोषणा की।

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने यहां संवाददाताओं को बताया कि ग्राहकों को यह क्षतिपूर्ति उन मामलों में भी दी जाएगी जहां ग्राहक गलती से अपना ‘वन-टाइम पासवर्ड’ (ओटीपी) धोखेबाजों के साथ साझा कर देते हैं।

केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह राशि 85,000 करोड़ रुपये के जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष से ग्राहकों को दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहक को जीवन में केवल एक बार ही क्षतिपूर्ति मिलेगी और वह भी तब जब धोखाधड़ी का कोई गलत इरादा न पाया जाए।

आरबीआई के अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में दो-तिहाई मामले 50,000 रुपये से कम के हैं। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी से प्रभावित लोगों में से ज्यादातर को इस सुविधा से लाभ होगा।

मल्होत्रा ​​ने कहा, ‘‘जब तक उनके साथ धोखाधड़ी होती है, चाहे वह स्वयं की गलती से हो या किसी और की गलती से, बिना कोई सवाल पूछे 25,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। हम उन्हें तभी क्षतिपूर्ति देंगे जब लेनदेन अनजाने में हुआ हो और उन्होंने अपना पैसा गंवाया हो।’’

उन्होंने कहा कि ग्राहकों की भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है और धोखाधड़ी की राशि का 15 प्रतिशत खाताधारक को वहन करना होगा, भले ही धोखाधड़ी 25,000 रुपये की सीमा से कम हो। उच्च मूल्य की धोखाधड़ी के मामलों में, क्षतिपूर्ति 25,000 रुपये तक सीमित रहेगा।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि क्षतिपूर्ति की रूपरेखा का मसौदा जल्द ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा।

डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा कि यह राशि जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष (डीईए) से दी जाएगी। इसमें 10 साल से अधिक समय से बिना दावे वाली जमा राशि भी शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य उस विशेष वर्ग को कवर करना है, जो अनजाने में इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है। इसलिए, क्षतिपूर्ति का वित्तीय बोझ बहुत अधिक नहीं होगा।’’

मल्होत्रा ​​ने यह भी घोषणा की कि आरबीआई धोखाधड़ी को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लेकर आएगा। इसमें विलंब से क्रेडिट और वरिष्ठ नागरिकों जैसे विशिष्ट वर्ग के उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण शामिल हो सकते हैं।’’

क्रेडिट में विलंब से तात्पर्य डिजिटल लेनदेन के लिए प्रस्तावित सुरक्षा व्यवस्था से है। इसमें कुछ लेन-देन से प्राप्त राशि को प्राप्तकर्ता के खाते में जानबूझकर थोड़ी देरी से जमा किया जाता है।

भाषा रमण अजय

अजय