दिल्ली सरकार ने ‘कारोबार सुगमता’ विधेयक, 2025 को मंजूरी दी

दिल्ली सरकार ने ‘कारोबार सुगमता’ विधेयक, 2025 को मंजूरी दी

दिल्ली सरकार ने ‘कारोबार सुगमता’ विधेयक, 2025 को मंजूरी दी
Modified Date: September 2, 2026 / 09:08 pm IST
Published Date: September 2, 2026 9:08 pm IST

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) दिल्ली सरकार ने ‘कारोबार सुगमता’ विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है। इसमें व्यवसायों के लिए आवश्यक मंजूरियों, पंजीकरण, लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाण पत्रों (एनओसी) की मौजूदा प्रक्रियाओं में मूलभूत बदलाव का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक बयान में यह जानकारी दी गई।

नियामकीय और अनुपालन बोझ को कम करने की केंद्र सरकार की पहल के दूसरे चरण के तहत तैयार इस विधेयक को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई। इस विधेयक को अब मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय के पास भेजा जाएगा।

प्रस्तावित कानून से व्यवसायों पर दोहरे पंजीकरण का बोझ भी कम होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी), भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), एमएसएमई उद्यम विकास अधिनियम या श्रम संहिताओं के तहत पहले से पंजीकृत उद्यमों को व्यापार, स्वास्थ्य-व्यापार, दुकानों और प्रतिष्ठानों के लिए अलग से पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।

प्रस्तावित कानून की प्रमुख विशेषता एकल-खिड़की प्रणाली है। इसके तहत एक सरल और अनुकूल ऑनलाइन प्रणाली बनाई जाएगी जहां व्यवसाय अपने संचालन से संबंधित मंजूरियों, पंजीकरण, अनापत्ति प्रमाण पत्र, लाइसेंस और अन्य आवश्यकताओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसमें भवन निर्माण योजना, अग्नि संबंधी मंजूरियां और पानी, सीवर तथा बिजली कनेक्शन जैसी सेवाएं भी शामिल होंगी।

नागरिकों और व्यवसायों को अब अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने और अलग-अलग आवेदन जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली राज्य औद्योगिक और अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) इस एकल-खिड़की प्रणाली के माध्यम से प्रदान की जाने वाली सभी व्यावसायिक मंजूरियों के लिए एकमात्र नोडल एजेंसी होगा।

गुप्ता ने बताया कि विधेयक की अनुसूची-3 में शामिल कई गतिविधियों के लिए आवेदन जमा करते ही स्वीकृति, अनुमति, लाइसेंस या अनापत्ति प्रमाणपत्र देने का प्रावधान होगा। निर्धारित कम जोखिम वाली श्रेणियों और तय सीमाओं के मामलों में स्व-घोषणा स्वीकार की जाएगी।

बयान के मुताबिक, जो गतिविधियां अनुसूची-3 में शामिल नहीं होंगी, उनके लिए मंजूरी, अनुमति, लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाणपत्र नागरिकों को समयबद्ध व सुगम सेवा उपलब्ध कराने के अधिकार संबंधी अधिनियम, 2026 में निर्धारित समय सीमा के भीतर दिए जाएंगे।

इसमें कहा गया है कि विधेयक में निर्धारित समय सीमा समाप्त होने पर वैधानिक रूप से मंजूरी माने जाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, यानी यदि निर्धारित अवधि में सक्षम प्राधिकारी की ओर से निर्णय नहीं लिया जाता है तो विधेयक में तय प्रावधानों के अनुसार मंजूरी मानी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार एक ऐसी प्रणाली बनाने के लिए काम कर रही है जिसमें व्यवसाय मालिकों और उद्यमियों को कई सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और एक ही जानकारी बार-बार न जमा करने पड़े या आवश्यक मंजूरियों के लिए लंबी अवधि तक इंतजार न करना पड़े।

सीएमओ ने कहा कि प्रस्तावित कानून में विश्वास आधारित निरीक्षण प्रणाली का भी प्रावधान है। किसी उद्यम के पंजीकृत होने के बाद तीन साल तक कोई नियमित निरीक्षण नहीं किया जाएगा। हालांकि, कोई गंभीर शिकायत मिलने पर निरीक्षण किया जा सकता है।

गुप्ता ने कहा कि इन उपायों से दिल्ली में कारोबार करने में लगने वाले समय, लागत और अनिश्चितता में काफी कमी आने की उम्मीद है तथा इससे नए निवेश को आकर्षित करने और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी।

भाषा नोमान नोमान अजय

अजय


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