डीजीएफटी ने निर्यातकों को रुपये में बिल जारी करने, भुगतान प्राप्त करने की अनुमति दी
डीजीएफटी ने निर्यातकों को रुपये में बिल जारी करने, भुगतान प्राप्त करने की अनुमति दी
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) सरकार ने निर्यातकों के लिए विदेशों में बिक्री का बिल भारतीय रुपये में जारी करने और भुगतान रुपये में प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए विदेश व्यापार नीति के कुछ प्रावधानों में संशोधन किया है।
इन संशोधनों का दायरा सभी देशों को किए जाने वाले निर्यात पर लागू होगा। हालांकि, गंतव्य देश के अनुसार नियम अलग-अलग होंगे।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा कि विदेश व्यापार नीति 2023 के दो अनुच्छेदों में संशोधन किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय रुपये में निर्यात अनुबंधों के मूल्य निर्धारण और निर्यात से प्राप्त आय के आधार पर एफटीपी लाभों की पात्रता से जुड़े प्रावधानों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन (प्राप्ति और भुगतान तरीका) विनियमन, 2023 के अनुरूप बनाना है।
एशियन क्लियरिंग यूनियन (एसीयू) से बाहर के देशों के लिए अब निर्यात अनुबंध और चालान यानी बिल किसी भी विदेशी मुद्रा या भारतीय रुपये में बनाए जा सकेंगे। इससे पहले आमतौर पर निर्यात से होने वाली आय का भुगतान परिवर्तनीय मुद्रा में प्राप्त करना होता था।
आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि नेपाल और भूटान को छोड़कर किसी भी देश से भारतीय रुपये में प्राप्त पात्र निर्यात भुगतान अब एफटीपी लाभ के लिए योग्य होंगे और निर्यात दायित्वों को पूरा करने में गिने जाएंगे।
जीटीआरआई के अनुसार, स्वीकृत बैंकिंग माध्यमों से प्राप्त रुपये में भुगतान को विदेशी मुद्रा में प्राप्त निर्यात भुगतान के बराबर माना जाएगा। इसके अलावा, भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एक्जिम बैंक) या भारत सरकार की ऋण व्यवस्था के तहत वित्त पोषित निर्यात के लिए भी भारतीय रुपये में बिल जारी किया जा सकेगा।
एसीयू वर्ष 1974 में स्थापित एक क्षेत्रीय भुगतान व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य व्यापार निपटान को आसान बनाना और विदेशी मुद्रा के बार-बार हस्तांतरण को कम करना है। इसके सदस्य देशों में बांग्लादेश, भूटान, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमा, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं।
अधिसूचना के अनुसार, बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमा, पाकिस्तान और श्रीलंका को किए जाने वाले निर्यात के लिए अनुबंधों में एसीयू द्वारा निर्धारित मुद्रा का उपयोग करना होगा। हालांकि, बिल और भुगतान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देशों के अनुसार भी किया जा सकता है।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ नेपाल और भूटान को अलग श्रेणी में रखा गया है। इन दोनों देशों के साथ निर्यात अनुबंध आमतौर पर भारतीय रुपये में ही किए और निपटाए जाने चाहिए या फिर आरबीआई के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि ईरान एसीयू नियमों के अंतर्गत आता है, लेकिन संवेदनशील वस्तुओं और प्रौद्योगिकी से जुड़े व्यापार में विदेश व्यापार नीति के अनुच्छेद 2.19 का पालन जारी रखना होगा।
श्रीवास्तव ने कहा कि यह संशोधन विदेश व्यापार नीति को आरबीआई के वर्ष 2023 में जारी विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों के अनुरूप बनाता है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय भुगतान में रुपये के व्यापक उपयोग की अनुमति दी गई है।
पहले आरबीआई से मंजूर बैंकिंग माध्यमों से रुपये में भुगतान प्राप्त करने वाले निर्यातकों को यह स्पष्ट नहीं था कि ऐसे भुगतान एफटीपी लाभ के लिए मान्य होंगे या नहीं। नए नियमों से भ्रम की स्थिति दूर हो गयी है और पात्र रुपये में प्राप्त भुगतान को विदेशी मुद्रा आय के बराबर माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि रुपये में भुगतान व्यवस्था से निर्यातकों की मुद्रा बदलने की लागत और विनिमय दर जोखिम कम हो सकते हैं। यह उन देशों के साथ व्यापार में विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, जहां डॉलर की कमी है या पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों तक पहुंच सीमित है।
श्रीवास्तव ने कहा कि इससे रुपये के अंतरराष्ट्रीय उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है और भारतीय निर्यातकों तथा विदेशी खरीदारों को हर लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या अन्य परिवर्तनीय मुद्रा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल नियामकीय अनुमति से बड़े पैमाने पर रुपये में व्यापार शुरू नहीं होगा। विदेशी खरीदारों के लिए रुपये की आसान उपलब्धता, विदेशी बैंकों के लिए रुपये के इस्तेमाल, निवेश, बदलाव और धन वापसी की व्यावहारिक व्यवस्था जरूरी होगी।
श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को देश-विशेष भुगतान व्यवस्था, आसान बैंकिंग प्रक्रिया, कम लागत वाली जोखिम प्रबंधन व्यवस्था, रुपये आधारित निर्यात ऋण और निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) सुरक्षा जैसी सुविधाओं को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि सहायक उपायों के बिना रुपये में बिल की सुविधा उपयोगी तो रहेगी, लेकिन यह व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला व्यापार विकल्प नहीं बन पाएगी।
भाषा रमण अजय
अजय

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