खनन क्षेत्र की पुरानी अड़चनें दूर करने में मदद करेगा एमएमडीआर संशोधन कानून : एनएमडीसी प्रमुख
खनन क्षेत्र की पुरानी अड़चनें दूर करने में मदद करेगा एमएमडीआर संशोधन कानून : एनएमडीसी प्रमुख
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) एनएमडीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अमिताव मुखर्जी ने बृहस्पतिवार को कहा कि खनन क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही परिचालन संबंधी अड़चनों को दूर करने में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 से मदद मिलेगी और इससे अधिक एकरूपता तथा पूर्वानुमेयता आएगी।
संसद ने 13 अगस्त को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक पारित किया था। इसमें राज्यों की खनिज अधिकारों और खनिज वाले क्षेत्रों पर कर लगाने की शक्तियों को सीमित करने का प्रावधान किया गया था।
एनएमडीसी ने बयान में कहा, ‘‘भारत के राष्ट्रपति ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है, जिससे खनन क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार का मार्ग प्रशस्त हुआ है।’’
मुखर्जी ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए संशोधनों से खनन क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही परिचालन संबंधी अड़चनें दूर होंगी तथा कर और शुल्क व्यवस्था में अधिक एकरूपता एवं पूर्वानुमेयता आएगी।
उन्होंने कहा कि इससे राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले अलग-अलग करों और अप्रत्याशित उपकरों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, जिनसे खनिजों के उत्खनन की लागत बढ़ी और खनन उद्योग में अनिश्चितता पैदा हुई।
मुखर्जी ने कहा, ‘‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 खनिज उत्खनन पर पड़ने वाले बोझ को बढ़ाने वाले असमान राज्य करों और अप्रत्याशित उपकरों पर अंकुश लगाकर लंबे समय से चली आ रही परिचालन संबंधी अड़चनों को सीधे दूर करता है।’’
एनएमडीसी के सीएमडी के अनुसार, कर और शुल्क व्यवस्था में अधिक निश्चितता से खनन क्षेत्र में नए पूंजी निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है तथा खनिज संसाधनों की खोज और विकास में तेजी आ सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे पूंजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, खनिजों की खोज में तेजी आएगी और घरेलू खनिज उत्पादन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।’’
भाषा योगेश अजय
अजय

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