Dhan Kharidi Target 2026-27: पिछले साल के मुकाबले इस साल कम धान खरीदी करेगी सरकार, इस वजह से लिया गया बड़ा फैसला, खाद्य सचिव ने दी जानकारी

Dhan Kharidi Target 2026-27: पिछले साल के मुकाबले इस साल कम धान खरीदी करेगी सरकार, इस वजह से लिया गया बड़ा फैसला, खाद्य सचिव ने दी जानकारी

Dhan Kharidi Target 2026-27: पिछले साल के मुकाबले इस साल कम धान खरीदी करेगी सरकार, इस वजह से लिया गया बड़ा फैसला, खाद्य सचिव ने दी जानकारी

Dhan Kharidi Target 2026-27: पिछले साल के मुकाबले इस साल कम धान खरीदी करेगी सरकार, इस वजह से लिया गया बड़ा फैसला, खाद्य सचिव ने दी जानकारी / Image: AI Generated

Modified Date: September 2, 2026 / 10:32 am IST
Published Date: September 2, 2026 9:05 am IST
HIGHLIGHTS
  • 2026-27 के लिए 708.64 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित
  • 2024-25 में 708.85 लाख टन धान की खरीद हुई थी
  • धान के बुवाई रकबे में कमी को इसकी प्रमुख वजह

नयी दिल्ली: Dhan Kharidi Target 2026-27 केंद्र सरकार ने एक अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 के खरीफ विपणन सत्र (केएमएस) के लिए 708.64 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य मंगलवार को तय किया है। केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा की अध्यक्षता में राज्यों के खाद्य सचिवों के साथ हुई समीक्षा बैठक के बाद यह लक्ष्य तय किया गया है।

12 लाख टन कम होगी धान खरीदी

Dhan Kharidi Target 2026-27 खाद्य मंत्रालय ने मंगलवार को बयान में कहा, ‘‘राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श के बाद आगामी खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान के रूप में खरीद का अनुमान 708.64 लाख टन तय किया गया है।’’ आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल पांच अगस्त तक खरीफ धान की वास्तविक खरीद 720.74 लाख टन तक पहुंच गई थी। वहीं, 2024-25 पूरे सत्र में 708.85 लाख टन और 2023-24 में 689.56 लाख टन धान की खरीद हुई थी। खरीद लक्ष्य में कमी का मुख्य कारण धान की बुवाई के रकबे में आई गिरावट है।

कम हो रहा धान उत्पादन का रकबा

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त तक धान का बुवाई क्षेत्र 414.10 लाख हेक्टेयर था, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 428.46 लाख हेक्टेयर था। दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 में खरीफ धान का उत्पादन 12.39 करोड़ टन रहने का अनुमान है। धान के रकबे में कमी को देखते हुए सरकार ने इस बार अपेक्षाकृत सतर्क खरीद लक्ष्य तय किया है। हालांकि, वास्तविक खरीद कितनी होगी, यह उपज, राज्यों में खरीद की व्यवस्था, मंडियों में धान की आवक और सरकारी एजेंसियों के जरिये बिकने वाले धान की मात्रा जैसे कारकों पर निर्भर करेगी।

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