‘विकसित भारत’ का लक्ष्य केंद्र और राज्यों की सामूहिक जिम्मेदारी, मिलकर करें काम: मोदी

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‘विकसित भारत' का लक्ष्य केंद्र और राज्यों की सामूहिक जिम्मेदारी, मिलकर करें काम: मोदी

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  • Publish Date - June 11, 2026 / 10:33 PM IST,
    Updated On - June 11, 2026 / 10:33 PM IST

नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ का दृष्टिकोण हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।

मोदी ने नीति आयोग की शासी परिषद की 11वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह भी कहा कि सभी राज्यों के विकसित हुए बिना देश ‘विकसित भारत’ नहीं बन सकता। उन्होंने कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास के लिए आकांक्षी जिला कार्यक्रम की तरह 100 जिलों की पहचान करने को कहा।

साथ ही, उन्होंने निवेश आकर्षित करने के लिए कारोबार सुगमता और शिकायतों के तेजी से निपटान की जरूरत बतायी।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘वैश्विक अनिश्चितता और अस्थिरता के बीच जब कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की वृद्धि गाथा दुनिया को प्रेरित कर रही है।’’

मोदी ने राज्यों से यह भी कहा कि वे कृत्रिम मेधा के मौकों और साइबर धोखाधड़ी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों से निपटने के उपायों के बीच संतुलन बनाए रखें। साथ ही, उन्होंने अल-नीनो की स्थितियों से जुड़े खतरों के प्रति आगाह किया और जल संरक्षण के लिए और मजबूत उपाय करने का आह्वान किया।

सहकारी संघवाद के महत्व का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘विकसित भारत’ का दृष्टिकोण हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।’’

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता की दिशा में देश के संकल्प को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया और विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनाई जाने वाली सबसे अच्छी गतिविधियों को अपनाने और लागू करने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने कई देशों के साथ भारत के हाल के व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए राज्यों से युवाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के ​​लिए मौके बनाने और संबंधित लोगों को इन समझौतों से मिलने वाले लाभ का सही इस्तेमाल करने के लिए तैयार करने को कहा।

उन्होंने राज्यों से भागीदार देशों से निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय रूप से काम करने का भी आग्रह किया।

उन्होंने निवेश आकर्षित करने के लिए अच्छी शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व का जिक्र करते हुए राज्यों से ब्रांडिंग, कारोबार सुगमता के साथ डेटा सेंटर तथा कृत्रिम मेधा जैसे उभरते क्षेत्रों में मौकों पर ध्यान देने का आग्रह किया।

मोदी ने अगली पीढ़ी के विनिर्माण पर भी ध्यान देने को कहा।

उन्होंने कहा कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए लोगों को कौशल से लैस करने के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है।

उन्होंने जिला स्तर पर, खासकर ‘आकांक्षी जिले के पैमानों के जरिये प्रगति का मूल्यांकन करने की जरूरत बतायी।’

प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया, ‘‘इसी तरह, सकारात्मक नतीजे लाने के लिए कृषि के क्षेत्र में भी 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए।’’ उन्होंने राज्यों से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया ताकि आकांक्षी दृष्टिकोण के जरिये उल्लेखनीय बदलाव लाया जा सके।’’

शासी परिषद की दिन भर चली बैठक में सभी राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों ने हिस्सा लिया। यह पहली बार है जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में भाग लिया।

मोदी ने भारत के 70 करोड़ युवाओं को देश की संपत्ति बताया और राज्यों से इस ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ को ‘विकास लाभांश’ में बदलने का आग्रह किया।

बयान के अनुसार, मुख्यमंत्रियों, उप-राज्यपालों और प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके पद पर 12 साल पूरे करने पर बधाई दी।

उन्होंने वैश्विक संकट का सामना करने, ऊर्जा जरूरतों के मामले में भारत की मजबूती बढ़ाने और वृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता भी दिखाई।

बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि बातचीत रचनात्मक रही और इसमें राज्यों की आकांक्षाओं, उम्मीदों, अनुभवों, बेहतरीन तौर-तरीकों और चुनौतियों की झलक मिली।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने बैठक के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक सभी राज्य विकसित नहीं हो जाते, तब तक देश ‘विकसित भारत’ नहीं बन सकता।

नीति आयोग के एक सदस्य ने बताया कि प्रधानमंत्री ने राज्यों से स्थानीय स्तर पर विकास का पता लगाने के लिए जिला स्तर पर जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का अनुमान लगाने को भी कहा।

लाहिड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्यों से ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके आधार पर निर्यात-उन्मुख रणनीतियां विकसित करने का आग्रह किया।

मोदी ने रक्षा विनिर्माण को एक उभरते हुए क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया, जहां भारत अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने राज्यों को इसकी वृद्धि से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतियां बनाने का आग्रह किया।

एक सवाल के जवाब में लाहिड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और शासी परिषद के अन्य सदस्यों को पता है कि भारत को नियोजित शहरीकरण की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट के कारण पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए किसी विशेष सहायता की मांग नहीं की।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल से संबंधित मांगों पर कोई विशेष चर्चा नहीं हुई। राज्य में भाजपा ने पहली बार सरकार बनाई है। लाहिड़ी पश्चिम बंगाल में विधायक रह चुके हैं।

एक अन्य सवाल के जवाब में लाहिड़ी ने स्पष्ट रूप से कहा कि पेपर लीक पर कोई चर्चा नहीं हुई।

बैठक का विषय ‘समावेशी मानव विकास रूपरेखा’ था, जो चार मुख्य स्तंभों… बुनियादी मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल, उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास, स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण और सभी के लिए समानता और सम्मान…पर केंद्रित था।

लाहिड़ी ने नीति आयोग द्वारा तैयार किए जा रहे ‘विकसित भारत 2047’ दस्तावेज के बारे में एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘…यदि आप एक महीने बाद पैदल मुंबई पहुंचना चाहते हैं, तो आपको यह योजना बनानी होगी कि आप अपनी यात्रा के 28वें या 29वें दिन कहां होंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, विकसित भारत के खाके को अब मध्यम अवधि के लक्ष्यों और अल्पकालिक लक्ष्यों में बांटा गया है। प्रधानमंत्री ने इस बारे में बात की है और कुछ मुख्यमंत्रियों ने भी इस पर बात की है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विकसित भारत सिर्फ 2047 का ही लक्ष्य नहीं है। विकसित भारत का मतलब है कि हमें कुछ चीज़ें लागू करनी हैं और एक तय तारीख तक कुछ लक्ष्य हासिल करने हैं।’’

लाहिड़ी ने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों ने रोजगार बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की।

उन्होंने मोदी के हवाले से कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने कहा कि कौशल विकास बहुत जरूरी है।’’

लाहिड़ी ने यह भी बताया कि कई मुख्यमंत्रियों ने ऊर्जा की कीमतों को प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया।

भाषा रमण अजय

अजय

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