नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) अगर पश्चिम एशिया संकट के कारण पैदा हुई रुकावटें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो मौजूदा वित्त वर्ष में भारत का उर्वरक सब्सिडी खर्च तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी का बजटीय आवंटन 1.71 लाख करोड़ रुपये है, लेकिन वैश्विक बाजार में यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और मिट्टी के अन्य पोषक तत्वों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण सब्सिडी खर्च बढ़ने की संभावना है।
सोमवार को इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकॉनमिक रिलेशंस (इक्रियर) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में उर्वरक विभाग के संयुक्त सचिव कृष्ण कांत पाठक ने जोर देकर कहा कि सरकार के पास फिलहाल उर्वरकों का पर्याप्त भंडार है, जो लगभग दो करोड़ टन है।
उन्होंने बताया कि उर्वरक अलग-अलग देशों से लंबी अवधि के समझौतों के जरिये मंगाए जा रहे हैं।
पाठक ने इस कार्यक्रम में, जिसका वीडियो इक्रियर की वेबसाइट पर जारी किया गया है, कहा, ‘‘लेकिन, इसकी एक कीमत है। यह कीमत, जो इस युद्ध की स्थिति से पहले सब्सिडी के रूप में लगभग दो लाख करोड़ रुपये थी। यह काफी बढ़ जाएगी, और यह हमारे लिए एक बोझ होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘…अगर यह समस्या बनी रहती है, तो यह (उर्वरक सब्सिडी) तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है।’’
उन्होंने कहा कि इस चरण में कुल सब्सिडी खर्च का अनुमान लगाना मुश्किल है।
पाठक ‘बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच भारत की उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को जोखिम-मुक्त करना और मांग प्रबंधन’ विषय पर एक गोलमेज चर्चा में बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि भारत सालाना लगभग सात करोड़ टन उर्वरक की खपत करता है।
पाठक ने औद्योगिक उपयोग के लिए यूरिया के दुरुपयोग पर भी चिंता व्यक्त की।
सोमवार को, केंद्र सरकार ने कहा कि देश में आने वाले खरीफ (गर्मी में बोई जाने वाली) मौसम के दौरान मिट्टी के पोषक तत्वों की मांग को पूरा करने के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है।
पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर एक अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि संकट के बाद घरेलू उत्पादन अच्छा रहा है, और देश पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उर्वरकों का आयात भी कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘देश में उर्वरक की कुल भंडार की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।’’
सचिव ने बताया कि इस साल खरीफ मौसम के लिए 390.54 लाख टन उर्वरक की जरूरत का अनुमान लगाया गया था, जिसके मुकाबले आज की तारीख में स्टॉक 200.12 लाख टन है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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