फिक्की विनिर्माण सूचकांक तीसरी तिमाही में अबतक के उच्चतम स्तर पर

फिक्की विनिर्माण सूचकांक तीसरी तिमाही में अबतक के उच्चतम स्तर पर

  •  
  • Publish Date - January 20, 2026 / 05:37 PM IST,
    Updated On - January 20, 2026 / 05:37 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) उत्पादन लागत अधिक रहने के बावजूद फिक्की विनिर्माण सूचकांक चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अबतक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इसमें 91 प्रतिशत कंपनियों ने स्थिर या उससे अधिक उत्पादन दर्ज किया है जो जुलाई-सितंबर के 87 प्रतिशत से अधिक है।

फिक्की के विनिर्माण पर तिमाही सर्वेक्षण (क्यूएसएम) के 68वें संस्करण में तीसरी (अक्टूबर-दिसंबर) तिमाही में आठ प्रमुख क्षेत्रों के विनिर्माताओं के प्रदर्शन एवं बाजार की स्थिति का आकलन किया गया।

इनमें मोटर वाहन कलपुर्जों, पूंजीगत सामान, रसायन, उर्वरक तथा दवा, इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रिकल, मशीन उपकरण, धातु व धातु उत्पाद, वस्त्र, परिधान तथा प्रौद्योगिकी वस्त्र तथा विविध वस्तुएं शामिल हैं।

लघु एवं मझोले उद्यम दोनों क्षेत्रों की विनिर्माण इकाइयों से प्रतिक्रियाएं प्राप्त की गई हैं जिनका वार्षिक कारोबार संयुक्त रूप से तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

करीब 57 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बिक्री के प्रतिशत के रूप में उत्पादन लागत में वृद्धि की जानकारी दी जो पिछली तिमाही के निष्कर्षों के अनुरूप है और यह दर्शाता है कि लागत अब भी अधिक है।

उद्योग मंडल ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन लागत में वृद्धि मुख्य रूप से कच्चे माल की उच्च लागत, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक, बिजली एवं यूटिलीटी लागत में वृद्धि के कारण हुई है।

तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में विनिर्माण सूचकांक का प्रदर्शन भारत के विनिर्माण क्षेत्र में निरंतर वृद्धि एवं बढ़ते आशावाद को दर्शाता है। यह आशावाद घरेलू मांग में भी स्पष्ट है क्योंकि 86 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में पिछली तिमाही की तुलना में अधिक या समान ऑर्डर की उम्मीद जताई है जो माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दर में कटौती की घोषणा के बाद और भी बढ़ गई है।

सर्वेक्षण के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र में मौजूदा औसत क्षमता उपयोग करीब 75 प्रतिशत है जो इस क्षेत्र में निरंतर आर्थिक गतिविधि को दर्शाता है। आगामी छह महीनों में निवेश एवं विस्तार के लिए भविष्य का निवेश दृष्टिकोण स्थिर है। 70 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने तीसरी तिमाही में निर्यात के स्तर में वृद्धि या पिछले तिमाही के 69 प्रतिशत की तुलना में समान स्तर की वृद्धि दर्ज की।

सर्वेक्षण के अनुसार, विनिर्माणकर्ताओं द्वारा भुगतान की जाने वाली औसत ब्याज दर 8.9 प्रतिशत बताई गई है। 87 प्रतिशत से कुछ अधिक उत्तरदाताओं ने कार्यशील पूंजी या दीर्घकालिक पूंजी के लिए बैंकों से पर्याप्त धनराशि की उपलब्ध होन की जानकारी दी है।

भाषा निहारिका रमण

रमण