नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू होने से नकदी लेनदेन नहीं बढ़ेगा। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने कहा कि इस फैसले से यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा का सिर्फ चार प्रतिशत प्रभावित होगा और इससे यूपीआई के इस्तेमाल में कमी आने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन किसी भी राशि के लिए पूरी तरह निशुल्क हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था तैयार कर रहा है कि एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। मंत्रालय ने इस संबंध में भुगतान की सुविधा देने वाले मंचों और यूपीआई से जुड़े अन्य हितधारकों के साथ चर्चा शुरू कर दी है।
सूत्रों ने कहा कि एमडीआर से वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों पर मुद्रास्फीति बढ़ाने वाला असर पड़ने की आशंका नहीं है। एमडीआर पर लगने वाला जीएसटी काफी हद तक इनपुट टैक्स क्रेडिट से समायोजित हो जाएगा, जिससे कुल लागत पर असर सीमित रहेगा।
उन्होंने कहा कि जीएसटी से जुड़े मुद्दे अनसुलझे रहने पर उन्हें जीएसटी परिषद के समक्ष रखा जा सकता है।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने 15 सितंबर को जारी परिपत्र में 2,000 रुपये से अधिक के कुछ यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का प्रावधान किया। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के लिए टिकाऊ राजस्व ढांचा तैयार करना है।
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा। इस शुल्क का भुगतान ग्राहक नहीं, बल्कि व्यापारी करेंगे। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये शुल्क लगेगा। हालांकि दो व्यक्तियों के बीच भुगतान और रोजमर्रा के अधिकांश व्यापारी भुगतान निःशुल्क बने रहेंगे।
रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए दो हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का शुल्क होगा। म्यूचुअल फंड और शेयर कारोबार जैसी पूंजी बाजार सेवाओं के लिए एमडीआर 0.02 प्रतिशत होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
यूपीआई क्यूआर कोड के जरिये महीने में एक लाख रुपये तक संग्रह करने वाले छोटे व्यापारियों को नए शुल्क से छूट दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि इससे करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।
इस बीच, वित्त मंत्रालय ने यूपीआई पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने के फैसले पर अमेरिकी दबाव के आरोपों को खारिज किया है। वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने कहा कि एनपीसीआई के नए दिशानिर्देश यूपीआई भुगतान पर अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड को रुपे से अधिक कोई लाभ नहीं देते हैं।
डीएफएस ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की 2026 की रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सेवाओं को लेकर की गई टिप्पणियों के जवाब में यह स्पष्टीकरण दिया। रिपोर्ट में अमेरिकी भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए रुपे के समान स्तर पर यूपीआई परिवेश में, खासकर यूपीआई पर क्रेडिट लेनदेन में, भागीदारी की कमी को लेकर चिंता जताई गई थी।
डीएफएस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि एनपीसीआई के परिपत्र में रुपे क्रेडिट कार्ड के अलावा किसी अन्य क्रेडिट कार्ड से यूपीआई पर क्रेडिट लेनदेन की अनुमति नहीं दी गई है। विभाग ने कहा कि एमडीआर को किसी बाहरी दबाव में लागू किए जाने का आरोप ‘पूरी तरह गलत और भ्रामक’ है।
कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किया है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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