नीतिगत दरों में कटौती का सबसे अधिक लाभ ग्राहकों को विदेशी बैंकों ने दिया: आरबीआई बुलेटिन

नीतिगत दरों में कटौती का सबसे अधिक लाभ ग्राहकों को विदेशी बैंकों ने दिया: आरबीआई बुलेटिन

नीतिगत दरों में कटौती का सबसे अधिक लाभ ग्राहकों को विदेशी बैंकों ने दिया: आरबीआई बुलेटिन
Modified Date: July 22, 2026 / 09:30 pm IST
Published Date: July 22, 2026 9:30 pm IST

मुंबई, 22 जुलाई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत दर में कटौती का सबसे अधिक लाभ ग्राहकों को विदेशी बैंकों ने दिया है। मौजूदा ब्याज दर कटौती चक्र के दौरान विदेशी बैंकों ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में ऋण और जमा, दोनों पर ब्याज दरों में अधिक कटौती की है। आरबीआई के बुधवार को जारी मासिक बुलेटिन में यह कहा गया।

बुलेटिन के अनुसार, फरवरी, 2025 से मई, 2026 के बीच मौद्रिक नीति में नरमी के दौरान अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने रेपो दर से जुड़ी बाह्य मानक आधारित ब्याज दर (ईबीएलआर) और कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) में कमी की। नई ऋण दरों में इस कटौती का सबसे अधिक लाभ बुनियादी ढांचा और अन्य बाह्य मानक आधारित ब्याज दर से जुड़े क्षेत्रों में देखने को मिला।

आंकड़ों के अनुसार, विदेशी बैंकों ने रुपये में लिये गये नए कर्ज पर भारित औसत ब्याज दर में 1.24 प्रतिशत की कटौती की। इसके मुकाबले निजी बैंकों ने 1.08 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 0.66 प्रतिशत अंक की कमी की।

रुपये में लिये गये बकाया ऋणों पर भी ब्याज कम करने में विदेशी बैंक सबसे आगे रहे। उन्होंने ब्याज दरों में 1.20 प्रतिशत की कटौती की, जबकि निजी बैंकों ने 0.98 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 0.81 प्रतिशत अंक की कमी की।

जमा दरों के मामले में भी विदेशी बैंकों ने सबसे अधिक कटौती की। नए घरेलू सावधि जमा पर भारित औसत ब्याज दर में विदेशी बैंकों ने 0.91 प्रतिशत की कमी की, जबकि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने क्रमशः 0.74 प्रतिशत और 0.73 प्रतिशत की कटौती की।

इसी तरह, मौजूदा जमा पर विदेशी बैंकों ने ब्याज दरों में 0.90 प्रतिशत की कमी की। यह निजी बैंकों की 0.46 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 0.53 प्रतिशत अंक की कटौती से काफी अधिक है।

आरबीआई ने पिछले साल फरवरी से अबतक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत अंक की कमी की है। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल फरवरी, अप्रैल और दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठकों में 0.25-0.25 प्रतिशत अंक तथा जून की बैठक में 0.50 प्रतिशत अंक की कटौती की थी। हालांकि, अगस्त, अक्टूबर और फरवरी, 2026 की मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो दर को यथावत रखा गया था।

भाषा रमण अजय

अजय


लेखक के बारे में