चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए बारीक नजर की जरूरत: अधिकारी

चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए बारीक नजर की जरूरत: अधिकारी

चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए बारीक नजर की जरूरत: अधिकारी
Modified Date: July 28, 2024 / 02:11 pm IST
Published Date: July 28, 2024 2:11 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रति ‘बारीक‘ नजर की जरूरत है और सरकार इलेक्ट्रिक वाहन तथा बैटरी जैसे उच्च प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्रों में पड़ोसी देश के एफडीआई आवेदनों पर विचार कर सकती है।

एक अधिकारी ने यह राय देते हुए कहा कि चीन से ऐसे क्षेत्रों में एफडीआई लिया जा सकता है, जिनके विकल्प दूसरे देशों में उपलब्ध नहीं हैं। चीन के पास विभिन्न प्रकार के कुछ आधुनिक पूंजीगत उपकरण हैं, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इस मुद्दे पर बारीक नजर की वकालत करते हुए सरकारी अधिकारी ने कहा कि हालांकि प्रेस नोट तीन के तहत नियमों को आसान बनाने की कोई योजना नहीं है, लेकिन उन क्षेत्रों में चीनी आवेदनों में तेजी लाई जा सकती है, जहां भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।

प्रेस नोट तीन के तहत, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले एफडीआई प्रस्ताव के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य है। भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमा और अफगानिस्तान हैं।

अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘‘हमें इस बात पर बारीकी से विचार करना होगा कि हमें उनकी (चीनी एफडीआई की) कहां जरूरत है और वे हमारी कहां मदद करने जा रहे हैं। हम उनके आने और अधिक मोबाइल बनाने में रुचि नहीं रखते हैं, लेकिन बैटरी या ई-वाहन जैसे विनिर्माण क्षेत्रों में उनके (चीन के) पास वास्तव में अच्छी तकनीक है।”

अधिकारी ने कहा कि चीनी निवेश उन क्षेत्रों में लाया जा सकता है, जहां भारत के पास कोई विकल्प नहीं है या जहां चीनी फर्मों के पास विशेष विशेषज्ञता और कौशल हैं।

उन्होंने कहा कि जहां हमें अपनी विनिर्माण क्षमता बनाने के लिए उनकी जरूरत है, तो हमें प्रेस नोट तीन के तहत उनके आवेदनों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है। हमारे पास इसे तेज करने के लिए कुछ सुझाव हैं, जिसपर सचिवों की समिति में चर्चा हो रही है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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