मुंबई, 23 जून (भाषा) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय बॉन्ड में लगभग 35,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। सरकार के इन बॉन्ड में निवेश से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट दिये जाने के बाद यह निवेश हुआ है। भारतीय समाशोधन निगम लि. के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
ये सभी निवेश भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों के पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के तहत किए गए।
आंकड़ों के अनुसार, इसका कारण एफएआर प्रवासी निवेशकों को बिना किसी निवेश सीमा के भारत सरकार की तय अवधि वाली प्रतिभूतियों में निवेश करने की अनुमति देता है।
मंगलवार को एफएआर प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो की हिस्सेदारी 3.58 लाख करोड़ रुपये थी, जो तीन जून को 3.23 लाख करोड़ रुपये थी।
इससे पहले, विदेशी निवेशकों ने मई में 5,512.108 करोड़ रुपये और अप्रैल में 5,262.016 करोड़ रुपये का निवेश किया था। हालांकि, मार्च में 17,687.988 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी।
सरकार ने पांच जून को आयकर अधिनियम में संशोधन करने वाला एक अध्यादेश जारी किया, ताकि एफपीआई के पास मौजूद सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री, विनिमय और हस्तांतरण से होने वाली ब्याज आय और पूंजी लाभ पर कर छूट दी जा सके।
यह छूट पिछली तारीख एक अप्रैल, 2025 से लागू होगी।
यह कदम सरकार द्वारा घरेलू बॉन्ड बाजार में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने और बाहरी दबाव के बीच रुपये को सहारा देने के मकसद से उठाया गया।
वर्तमान में, विदेशी निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध शेयरों और बॉन्ड पर 12.5 प्रतिशत का दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर देना पड़ता है, जबकि सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज पर 20 प्रतिशत का ‘विदहोल्डिंग’ कर (स्रोत पर कर कटौती) लगता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में एफएआर के तहत उपलब्ध प्रतिभूतियों के दायरे का विस्तार किया और इसमें 15-वर्षीय, 30-वर्षीय और 40-वर्षीय अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों के सभी नए निर्गम को शामिल किया।
केंद्रीय बैंक ने ‘सामान्य मार्ग’ के तहत एफपीआई निवेश के लिए अल्पकालिक निवेश और व्यक्तिगत प्रतिभूतियों से संबंधित सीमाओं को भी हटा दिया।
भाषा रमण अजय
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