नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) तेलंगाना सरकार ने मंगलवार को केंद्र से आग्रह किया कि वह चालू खरीफ सत्र में डीएपी और यूरिया की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य की खाद की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करे।
राज्य के कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव और सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने यहां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया।
राव ने बताया कि खरीफ सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्य में डीएपी और यूरिया खाद की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है।
राज्य सरकार की विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने केंद्र से आवंटित कोटे और वास्तविक आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने का अनुरोध किया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राज्य को खाद की अपनी पूरी जरूरत मिल सके।
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दालों और तिलहन की खरीद के संबंध में, मंत्री ने मांग की कि केंद्र 25 प्रतिशत खरीद सीमा को खत्म करे और समर्थन मूल्य पर पूरी उपज खरीदे।
राव ने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार रिकॉर्ड उत्पादन के कारण थोक दरों में गिरावट के बीच एमएसपी पर मक्का और ज्वार की खरीद करे।
उन्होंने बताया कि किसानों को समर्थन देने के लिए मक्का और ज्वार की खरीद में राज्य सरकार पहले ही काफी वित्तीय बोझ उठा चुकी है।
केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ एक अलग बैठक में, राव ने मांग की कि केंद्र सरकार कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 44 प्रतिशत करे।
शुल्क में कटौती से तेलंगाना में ‘ऑयल पाम’ किसानों को नुकसान हो रहा था, जहां खेती का दायरा तीन लाख एकड़ तक बढ़ गया है और इसमें 70,000 किसान शामिल हैं।
राज्य सरकार अगले तीन वर्षों में इस क्षेत्र को 10 लाख एकड़ तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
बयान में कहा गया है कि मंत्री ने चिंता व्यक्त की कि कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क में हालिया कटौती के कारण घरेलू पामतेल किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
मंत्री ने बताया कि आयात शुल्क में कटौती के कारण विदेशों से कम कीमत वाले पाम तेल की आवक बढ़ गई है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें गिर गई हैं।
भाषा राजेश राजेश अजय
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